Maharashtra: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बोले- “दुनिया ताकतवर की सुनती है, भारत अब देगा नया मार्ग”

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शक्ति, वैश्विक संघर्ष और भारत की भूमिका को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। नागपुर में आयोजित संघ के स्वयंसेवी प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि आज की दुनिया में केवल सच होना ही काफी नहीं है, सम्मान केवल शक्ति से ही मिलता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की शक्ति का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि दुनिया का मार्गदर्शन करना है।
“कमजोरों को हमेशा झुकना पड़ता है” – मोहन भागवत
वैश्विक महाशक्तियों की कार्यशैली पर बात करते हुए संघ प्रमुख ने कहा दुनिया हमेशा उन्हीं की बात सुनती है जिनके पास शक्ति होती है। शक्तिशाली लोग अपनी मर्जी से काम करते हैं, चाहे किसी देश को जीतना हो, बम गिराना हो या तेल की सप्लाई रोकना हो।इस व्यवस्था में कमजोरों को हमेशा झुकना पड़ता है। इसलिए हम अपने देश को हर मोर्चे पर समृद्ध और शक्तिशाली बनाना चाहते हैं।भारत जब शक्तिशाली बनेगा, तो उसका लक्ष्य प्रभुत्व जमाना नहीं होगा। भारत एक आध्यात्मिक रूप से समर्पित राष्ट्र के तौर पर धर्म और सदाचार का प्रसार कर दुनिया को नया रास्ता दिखाएगा।
वैश्विक संघर्ष और भारत पर असर (ईरान-अमेरिका विवाद)
दुनिया में चल रहे युद्ध और संघर्षों का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज की वैश्विक कड़ियों के कारण युद्ध से दूर रहने वाले देश भी प्रभावित होते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “ईरान और अमेरिका के बीच तनाव या युद्ध चलता है, लेकिन उसका सीधा असर भारत में तेल की कीमतों पर पड़ता है।” उन्होंने आह्वान किया कि लोगों को चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बीच छिपे अवसरों को पहचानना चाहिए।
पर्यावरण और भौतिक विकास के अंतर्विरोध पर चिंता
संघ प्रमुख ने दुनिया के मौजूदा विकास मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज पर्यावरण और विकास को एक-दूसरे का विरोधी मान लिया गया है। भौतिकवादी विकास के लिए प्रकृति और पर्यावरण का बेरहमी से शोषण किया जाता है। दूसरी तरफ, जब पर्यावरण रक्षा की बात आती है, तो कुछ लोग विकास को ही रोक देने की मांग करने लगते हैं।दुनिया इस समय व्यक्तिगत अधिकारों, सामाजिक हितों और पर्यावरण संरक्षण के त्रिकोण में फंसी और भ्रमित है। वैश्विक स्तर पर ऐसा कोई मॉडल नहीं है जो सुख, शांति और पर्यावरण को एक साथ सुरक्षित रख सके।
“अब भारत का समय आ गया है”
मोहन भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी कार्रवाई के लिए मानव के शरीर, मन और बुद्धि के बीच समन्वय आवश्यक है, जिसमें पश्चिमी मॉडल विफल रहा है। उन्होंने कहा कि अब भारत का समय आ गया है, क्योंकि पूरी दुनिया इस समय संघर्ष-आधारित और स्वार्थी विकास मॉडल के विकल्प तलाश रही है, और यह विकल्प केवल भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और सनातन संस्कृति ही दे सकती है।



