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Jharkhand: जमशेदपुर में नदी और पहाड़ पर राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियां पूरी, वी. गोपाला गोवड़ा और जलपुरुष राजेंद्र सिंह 22 मई को करेंगे उद्घाटन

जमशेदपुर : देश में नदियों और पर्वतों के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट, पर्यावरण असंतुलन और जल संरक्षण को लेकर शुक्रवार, 22 मई 2026 की सुबह 10:00 बजे से जमशेदपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शंखनाद होने जा रहा है। साकची स्थित मोती लाल नेहरू पब्लिक स्कूल के ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाले इस महासम्मेलन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। देश के कोने-कोने से प्रख्यात पर्यावरणविद् और डेलीगेट्स (प्रतिनिधि) लौहनगरी पहुंच चुके हैं।इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पर्वतों और नदियों के संरक्षण के लिए देश में एक ठोस और कड़े ‘संरक्षण अधिनियम’ का कानूनी मसौदा तैयार करना है।

पूर्व न्यायाधीश और ‘जलपुरुष’ संयुक्त रूप से करेंगे उद्घाटन

सम्मेलन का उद्घाटन शुक्रवार सुबह 10:00 बजे एक बेहद गरिमामयी सत्र के साथ होगा।सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी. गोपाला गोवड़ा और देश के विख्यात ‘जलपुरुष’ राजेंद्र सिंह संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर इस दो दिवसीय विमर्श की शुरुआत करेंगे। इस मौके पर सम्मेलन के संरक्षक व जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय, प्रख्यात पर्यावरणविद दिनेश मिश्र, डॉ. गोपाल शर्मा, बी. सत्यनारायणा, बिभूति देबबर्मा, अरुण कुमार शुक्ला, युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण, भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी और एमिटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पीयूष कांत पाण्डेय समेत कई अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ मंच साझा करेंगे।

पहले दिन के तीन तकनीकी सत्र: मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

सम्मेलन के संरक्षक सरयू राय ने बताया कि 22 मई को होने वाले वैचारिक मंथन को तीन मुख्य तकनीकी सत्रों में विभाजित किया गया है।

उद्घाटन सत्र (सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे): इस सत्र में मुख्य अतिथियों के उद्बोधन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर आधारित एक विशेष ‘स्मारिका’ का विमोचन किया जाएगा।

प्रथम तकनीकी सत्र (दोपहर 12:00 बजे से 02:00 बजे): इस सत्र का मुख्य विषय ‘पर्वत और जल संरक्षण, संवर्धन तथा संरक्षण अधिनियम की आवश्यकता’ है। इसमें देश भर से आए 9 प्रमुख वक्ता अपनी शोधपरक राय और व्यावहारिक सुझाव सामने रखेंगे।

द्वितीय तकनीकी सत्र (दोपहर 03:00 बजे से शाम 05:00 बजे): इस सत्र में ‘पर्वतों के संरक्षण के लिए कानून का क्या मसौदा हो’ विषय पर एक व्यापक ग्रुप डिस्कशन (सामूहिक चर्चा) होगा। इसमें 12 शीर्ष विशेषज्ञ बैठेंगे, जो प्रस्तावित कानून के मसौदे में क्या जोड़ना है और क्या हटाना है, इस पर अंतिम मुहर लगाएंगे।

तृतीय तकनीकी सत्र (शाम 05:45 बजे से रात्रि 07:45 बजे): इस अंतिम सत्र में प्रजेंटेशन और पैनल डिस्कशन होगा, जिसमें 10 पैनलिस्ट शामिल होकर आज की औद्योगिक प्रगति और नदियों-पहाड़ों के सह-अस्तित्व पर अपनी बात रखेंगे।

देश की 7 प्रतिष्ठित संस्थाएं संयुक्त रूप से कर रही हैं मेजबानी

पर्यावरण के क्षेत्र में जमशेदपुर में होने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा और केंद्रित राष्ट्रीय प्रयास माना जा रहा है। इस दो दिवसीय सम्मेलन का सफल आयोजन किसी एक संस्था द्वारा नहीं, बल्कि देश की सात बड़ी और प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है जिसमे युगांतर भारती,स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट,तरुण भारत संघ,आईआईटी (आईएसएम) धनबाद,जल बिरादरी,नेचर फाउंडेशन और मिशन Y शामिल है।

सरयू राय का संदेश

सम्मेलन की पूर्व संध्या पर विधायक सरयू राय ने कहा कि जमशेदपुर और झारखंड के पठारी इलाके (जैसे दलमा और स्वर्णरेखा नदी क्षेत्र) पर्यावरण क्षरण का दंश झेल रहे हैं। ऐसे में यह सम्मेलन केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां तैयार होने वाले ड्राफ्ट को केंद्र और राज्य सरकारों को भेजा जाएगा ताकि नदियों और पहाड़ों को कानूनी सुरक्षा कवच मिल सके।

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