Delhi: चुनाव आयोग ने पीएम मोदी को ‘आतंकवादी’ कहने पर मल्लिकार्जुन खरगे को नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने बुधवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनकी ‘आतंकवादी’ वाली टिप्पणी को लेकर की गई है। आयोग ने खरगे से इस विवादित बयान पर अगले 24 घंटों में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
भाजपा के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की शिकायत
चुनाव आयोग ने यह कदम भारतीय जनता पार्टी के एक भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल द्वारा दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत के बाद उठाया है।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने व्यक्तिगत रूप से आयोग से मुलाकात की। भाजपा नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री पद की गरिमा और देश के नागरिकों का अपमान बताते हुए खरगे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
क्या था विवादित बयान?
मंगलवार (21 अप्रैल) को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने AIADMK और भाजपा के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा था “ये AIADMK के लोग… वे मोदी के साथ कैसे जा सकते हैं? वह एक आतंकवादी हैं। उनकी पार्टी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती है। ये लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं, इसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।”खरगे ने आगे मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की प्रशंसा करते हुए AIADMK को भाजपा का “मूक-गुलाम” करार दिया था।
राजनीतिक घमासान और भाजपा का पलटवार
बयान के सामने आते ही देश भर में सियासी पारा चढ़ गया है।142 करोड़ भारतीयों का अपमान: भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पीएम मोदी को आतंकी कहना न केवल एक व्यक्ति का, बल्कि पूरे देश का अपमान है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि चुनाव प्रचार के दौरान भाषा की मर्यादा का इस कदर गिरना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।हालांकि, विवाद बढ़ता देख खरगे ने बाद में अपने बयान पर सफाई देने की कोशिश की थी, लेकिन भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाने में जुट गई है।
आगे क्या?
चुनाव आयोग अब कांग्रेस अध्यक्ष के जवाब का इंतजार कर रहा है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो आयोग खरगे के चुनाव प्रचार पर अस्थायी प्रतिबंध या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। तमिलनाडु और अन्य राज्यों में जारी चुनावी सरगर्मी के बीच इस नोटिस ने कांग्रेस की रणनीति को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है।



