Jharkhand INFACTNews

Jharkhand: मिरूडीह कचरा ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन पर ग्रामीणों का विरोध, वार्ड सभा में उठेंगे सवाल

आदित्यपुर: आदित्यपुर नगर निगम के लिए कचरा प्रबंधन की समस्या एक बार फिर चुनौती बन गई है। वर्षों की कवायद और तकनीकी अड़चनों को दूर करने के बाद मिरूडीह में कचरा ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हो गया, लेकिन संचालन शुरू होने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया। बुधवार को प्लांट में कचरा गिराने की शुरुआत होनी थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।मौके पर मेयर संजय सरदार, डिप्टी मेयर, नगर निगम के अधिकारी और करीब आधा दर्जन पार्षद पहुंचे थे। ग्रामीणों ने प्लांट की स्थापना की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रशासन और नगर निगम से ग्रामसभा से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।

पांचवीं अनुसूची का हवाला देकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि मिरूडीह का क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है। ऐसे में इतने बड़े भूभाग पर कचरा ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने से पहले किस प्रक्रिया का पालन किया गया और स्थानीय स्तर पर किसकी सहमति ली गई, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट स्थापित करने से पहले उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं किया गया। साथ ही, उन्हें ग्रामसभा या वार्ड सभा से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। ग्रामीणों ने मांग की कि नगर निगम और प्रशासन संबंधित अभिलेख सामने रखकर पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करें।

शनिवार को बुलाई जाएगी वार्ड सभा

ग्रामीणों के विरोध के बाद आगामी शनिवार को वार्ड सभा बुलाने का निर्णय लिया गया है। अब इस बैठक में ग्रामीणों की आपत्तियों और प्लांट के संचालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।हालांकि, वार्ड सभा बुलाए जाने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि प्लांट के निर्माण से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं, तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने में क्या परेशानी है? वहीं, यदि प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तो अब दोबारा वार्ड सभा बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? इन सवालों पर निगम प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

मेयर ने फाइल मंगाकर जांच कराने की बात कही

मेयर संजय सरदार ने ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि कचरा ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किस आधार पर किया गया, इससे संबंधित फाइल मंगाकर जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि स्थानीय ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।मेयर के इस बयान के बाद परियोजना से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया पर चर्चा तेज हो गई है। प्लांट तैयार होने के बाद यदि उसके निर्माण के आधार और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जरूरत पड़ रही है, तो परियोजना की योजना और प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना निगम प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

कचरा प्रबंधन की समस्या के समाधान पर लगा ब्रेक

आदित्यपुर नगर निगम लंबे समय से शहर के कचरे के स्थायी और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था करने की चुनौती से जूझ रहा है। मिरूडीह में तैयार कचरा ट्रीटमेंट प्लांट को इसी समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था।लेकिन संचालन शुरू होने से पहले ही स्थानीय विरोध ने परियोजना के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब मामला केवल प्लांट के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों की सहमति, सामाजिक प्रभाव और आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।यदि सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गई हैं, तो नगर निगम को संबंधित दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि कोई प्रक्रिया अधूरी है, तो उसकी पहचान कर जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा।फिलहाल मिरूडीह में कचरा गिराने की योजना ग्रामीणों के विरोध के कारण अटकी हुई है। अब सबकी नजर शनिवार को होने वाली वार्ड सभा पर टिकी है। बैठक में ग्रामीणों की आपत्तियों का समाधान निकलता है या कचरा ट्रीटमेंट प्लांट को संचालन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button