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Maharashtra : नागपुर में शिवसेना शिंदे गुट का ‘ऑपरेशन टाइगर’, संजय निरुपम का दावा- उद्धव गुट के 20 में से 15-16 विधायक हमारे संपर्क में

नागपुर : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की आहट के बीच सूबे की सियासत में दल-बदल और शह-मात का खेल तेज हो गया है। नागपुर में शुक्रवार को महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस, एनसीपी शरद पवार और शिवसेना यूबीटी) को उस समय बड़ा रणनीतिक झटका लगा, जब तीनों पार्टियों के सैकड़ों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से शिवसेना (शिंदे गुट) की सदस्यता ग्रहण कर ली।इस हाई-प्रोफाइल ज्वाइनिंग कार्यक्रम के दौरान शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम, महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत, वित्त राज्य मंत्री आशीष जायसवाल और पूर्व सांसद व वर्तमान विधायक कृपाल तुमाने मुख्य रूप से मंच पर मौजूद रहे।

संजय निरुपम का बड़ा दावा: यूबीटी के 15-16 विधायक पाला बदलने को तैयार

इस मौके पर मीडिया (इंडिया टीवी) से खास बातचीत करते हुए पूर्व सांसद संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट में बड़ी टूट का दावा कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।संजय निरुपम ने सीधे तौर पर कहा “यह नागपुर में हमारा ‘ऑपरेशन टाइगर’ है। उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास जो सिमित संख्या बची है, उसमें से भी अधिकांश लोग घुटन महसूस कर रहे हैं। मैं जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि यूबीटी के वर्तमान 20 विधायकों में से कम से कम 15 से 16 विधायक इस वक्त हमारे शीर्ष नेतृत्व के सीधे संपर्क में हैं और वे किसी भी समय शिवसेना शिंदे गुट में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

“एकनाथ शिंदे का नेतृत्व आकर्षक, विकास ही मुख्य एजेंडा”

पार्टी में हो रहे इस बंपर ज्वाइनिंग की वजह बताते हुए निरुपम ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की कार्यशैली की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जमीनी कार्यकर्ताओं को एकनाथ शिंदे का सरल और सुलभ नेतृत्व बेहद पसंद आ रहा है। वे रोजाना सैकड़ों कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करते हैं। राज्य का ‘विकास’ उनका एकमात्र और मुख्य एजेंडा है।निरुपम ने नए शामिल होने वाले नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी ने अपने दोनों हाथ खोल रखे हैं। जो भी शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के विचारों के प्रति वफादार है, उसका स्वागत है। नए और पुराने कार्यकर्ताओं को उनकी योग्यता और सांगठनिक क्षमता के आधार पर पार्टी में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।

“उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लिए हिंदुत्व को दी तिलांजलि”

जब संजय निरुपम से साल 2022 के ऐतिहासिक दलबदल और बगावत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2022 में जो एकनाथ शिंदे साहब के नेतृत्व में वैचारिक उठाव हुआ था, जिसमें 40 विधायक एक साथ निकले थे, वह उद्धव जी की नीतियों के खिलाफ कार्यकर्ताओं का आक्रोश था।निरुपम ने आरोप लगाया “उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की कुर्सी और सत्ता के लोभ में बालासाहेब ठाकरे के प्रखर हिंदुत्व के विचारों को पूरी तरह तिलांजलि दे दी। उन्होंने कांग्रेस और वैचारिक धुर विरोधियों से हाथ मिलाया। यही कारण है कि पूरे महाराष्ट्र में जमीनी पदाधिकारी लगातार उनका साथ छोड़ रहे हैं, क्योंकि असली शिवसेना वही है जो बालासाहेब के सिद्धांतों पर अडिग है।”

विदर्भ में बदलेगा सियासी समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नागपुर (जो कि विदर्भ का मुख्य केंद्र और भाजपा-आरएसएस का गढ़ माना जाता है) में शिवसेना शिंदे गुट का इस तरह सक्रिय होना और विपक्षी कुनबे में सेंधमारी करना आगामी चुनावों में महायुति (बीजेपी -शिंदे-अजीत पवार) को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिला सकता है। इस ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बाद नागपुर और आस-पास के जिलों में जमीनी स्तर पर सांगठनिक फेरबदल की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है।

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