Bihar: गयाजी में स्मिता ठाकरे ने किया बाल ठाकरे और पूर्वजों का पिंडदान, राजनीति में आने पर भी दिया जवाब

गया: शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे ने मंगलवार को गयाजी में अपने ससुर बाल ठाकरे, पिता मधुकर चितरे समेत परिवार के अन्य पूर्वजों के लिए गयाश्राद्ध किया। पितृपक्ष मेले के दौरान उन्होंने विष्णुपद मंदिर परिसर और फल्गु तट स्थित शंकराचार्य पार्क में करीब दो घंटे तक पिंडदान का विधान पूरा किया। इसके बाद देवघाट पर फल्गु नदी में पिंड अर्पित कर तर्पण किया और विष्णुचरण पर पिंड चढ़ाकर दर्शन-पूजन किया।
बाल ठाकरे समेत परिवार के पूर्वजों के लिए किया पिंडदान
गयापाल कल्लू लाल चौधरी ने पूरे विधि-विधान के साथ स्मिता ठाकरे के माध्यम से बाल ठाकरे समेत परिवार के अन्य पूर्वजों का गयाश्राद्ध कराया। मंगलवार को फल्गु और विष्णुचरण से जुड़े विधान पूरे किए गए। बुधवार को अक्षयवट का विधान किया जाएगा। इसके बाद तीर्थ पुरोहित से सुफल लेकर गयाश्राद्ध की प्रक्रिया संपन्न होगी।पिंडदान के बाद स्मिता ठाकरे ने कहा कि उन्होंने अपने ससुर, सास, पिता और अन्य पूर्वजों के लिए गयाश्राद्ध किया है। उन्होंने बताया कि वह पहली बार गया आई हैं और यहां आकर उन्हें अच्छा लगा। उनके अनुसार, पिंडदान के माध्यम से उन्होंने अपने पितरों को याद कर उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की।
सीता माता की पिंडदान कथा से मिली प्रेरणा
स्मिता ठाकरे ने कहा कि सीता माता से जुड़ी पिंडदान की कथा सुनने के बाद उन्होंने गया आकर गयाश्राद्ध करने का निर्णय लिया। उन्होंने वृंदावन के श्री मां तुलसी पीठाधीश्वर तुलसी जी महाराज के सानिध्य में पिंडदान करने के अनुभव को भी अच्छा बताया और कहा कि इससे उन्हें मन की शांति मिली।
बाल ठाकरे के विचारों को आगे ले जाने की बात
स्मिता ठाकरे ने कहा कि बाल ठाकरे के विचारों को आगे ले जाना है और दूसरों का सम्मान करना उन्होंने उनसे सीखा है। उन्होंने सनातन धर्म को आगे ले जाने और हिंदुत्व से जुड़े विचारों के प्रचार की बात भी कही। ये उनके स्वयं के बताए विचार हैं।
राजनीति में आने के सवाल पर क्या बोलीं स्मिता ठाकरे?
राजनीति में आने की संभावना से जुड़े सवाल पर स्मिता ठाकरे ने कहा कि वह अब तक राजनीति में नहीं रही हैं और उन्होंने समाजसेवा की है। उन्होंने कहा कि अगर इच्छा हुई तो वह राजनीति में आ सकती हैं।योग गुरु संतोषानंद जी महाराज के मुताबिक, स्मिता ठाकरे सोमवार को गया पहुंची थीं और बोधगया में रुकी थीं। मंगलवार को फल्गु और विष्णुचरण का विधान किया गया, जबकि बुधवार को अक्षयवट का विधान किया जाएगा।



