भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश करने की तैयारी में है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने यूसीसी की अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी है। समिति ने अपनी अनुशंसाओं के साथ विधेयक का प्रारूप भी तैयार कर सरकार को सौंप दिया है।
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन होगा अनिवार्य
प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लिव-इन संबंध में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीयन अनिवार्य होगा। यदि कोई बिना पंजीयन के लिव-इन में रहता है और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को मिलती है, तो इसे अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं, यदि दोनों पक्ष अलग होना चाहते हैं तो उन्हें रजिस्ट्रार के समक्ष आवेदन देना होगा।
आदिवासी समुदाय रहेगा यूसीसी के दायरे से बाहर
समिति की सिफारिशों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति, घुमंतु, अर्द्धघुमंतु तथा मतांतरित आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है। विवाह, तलाक और पारिवारिक कानूनों से जुड़े समान प्रावधान अन्य समुदायों पर लागू करने का प्रस्ताव है।
लिव-इन से जन्मे बच्चों को मिलेगा उत्तराधिकार
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, पंजीकृत लिव-इन संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों को वैधानिक उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा। साथ ही माता-पिता दोनों को बच्चे की संपत्ति पर अधिकार होगा। पति की मृत्यु होने की स्थिति में संपत्ति पर मां का अधिकार सुनिश्चित करने का भी प्रस्ताव शामिल किया गया है।
विधेयक लागू होने की प्रक्रिया
सरकार द्वारा रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद विधि एवं विधायी विभाग विधेयक का मसौदा वरिष्ठ सचिव समिति के समक्ष रखेगा। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधानसभा से पारित होने और राज्यपाल की अनुमति के बाद विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया पूरी होने में चार से पांच महीने का समय लग सकता है।



