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Jharkhand: गिरिडीह में 28 से 30 जून तक चलेगा राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान, 4.91 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की खुराक

गिरिडीह: जिले में 28 जून से 30 जून 2026 तक राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत जन्म से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो से बचाव के लिए पोलियो रोधी दवा की खुराक पिलाई जाएगी। जिला स्वास्थ्य विभाग ने अभियान की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और इसे सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई हैं।

4.91 लाख से अधिक बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाने का लक्ष्य

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गिरिडीह जिले में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 4,91,038 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के दौरान प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नजदीकी पोलियो बूथ पर अवश्य लेकर जाएं और उन्हें जीवनरक्षक पोलियो की दो बूंद जरूर पिलाएं।

जिले में बनाए गए 2,337 पोलियो बूथ

अभियान के सफल संचालन के लिए पूरे जिले में 2,337 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं। इन बूथों पर 4,793 स्वास्थ्यकर्मी एवं सहयोगी कर्मी तैनात रहेंगे। वहीं अभियान की निगरानी के लिए 453 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं, जो विभिन्न बूथों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।

ट्रांजिट और मोबाइल टीमों का भी होगा संचालन

यात्रा कर रहे परिवारों एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 45 ट्रांजिट दल और 9 मोबाइल दल गठित किए गए हैं। इन टीमों की निगरानी के लिए 23 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं।इसके अलावा, वैक्सीन के सुरक्षित भंडारण और समय पर आपूर्ति के लिए जिले में 210 सब-डीपो बनाए गए हैं।

6.21 लाख बीओपीवी वैक्सीन डोज उपलब्ध

स्वास्थ्य विभाग को अभियान के लिए 6,21,180 डोज बीओपीवी वैक्सीन प्राप्त हुई है। विभाग का कहना है कि इससे सभी लक्षित बच्चों को समय पर पोलियो की खुराक उपलब्ध कराई जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग की अपील- कोई भी बच्चा न छूटे

जिला स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है। विभाग ने कहा कि यदि कोई बच्चा पोलियो की खुराक लेने से छूट जाता है तो भविष्य में उसे पोलियो संक्रमण का खतरा बना रह सकता है। इसलिए प्रत्येक बच्चे तक “दो बूंद जिंदगी की” पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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