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Uttar Pradesh: राजू पाल हत्याकांड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से दोषी आबिद को सशर्त जमानत, 2005 के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला

प्रयागराज। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के तत्कालीन विधायक राजू पाल हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अभियुक्त आबिद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।आबिद को वर्ष 2024 में सीबीआई कोर्ट ने अन्य दोषियों के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई लंबित रहने और अन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उसे जमानत प्रदान की है।

25 जनवरी 2005 को हुई थी राजू पाल की हत्या

गौरतलब है कि 25 जनवरी 2005 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) के धूमनगंज थाना क्षेत्र में बसपा विधायक राजू पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में देवी लाल पाल और संदीप यादव की भी मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य लोग घायल हुए थे।इस मामले में राजू पाल की पत्नी पूजा पाल की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, बाद में मामला सीबीसीआईडी को सौंपा गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने पुनः जांच कर 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

किन आधारों पर मिली जमानत?

हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में आबिद का नाम दर्ज नहीं था।उसका नाम केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर जोड़ा गया।मामले में कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई।आबिद के पास से कोई आपत्तिजनक या अपराध से जुड़ा सामान बरामद नहीं हुआ।अदालत में लंबित अपीलों की बड़ी संख्या के कारण निकट भविष्य में अपील की अंतिम सुनवाई संभव नहीं दिख रही है।

अतीक अहमद और अशरफ की हो चुकी है मौत

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले के प्रमुख आरोपी पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ अहमद की ट्रायल के दौरान हत्या हो चुकी है, जिसके कारण उनके खिलाफ मुकदमा समाप्त हो गया।वर्तमान में इस मामले में शेष दोषी न तो सांसद हैं और न ही विधायक।

2024 में आया था ऐतिहासिक फैसला

करीब 19 वर्ष तक चली सुनवाई के बाद 29 मार्च 2024 को लखनऊ स्थित सीबीआई कोर्ट की विशेष न्यायाधीश कविता मिश्रा ने फैसला सुनाया था। कोर्ट ने आबिद समेत सात आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

इन आरोपियों को हुई थी सजा

सीबीआई कोर्ट ने निम्नलिखित आरोपियों को दोषी करार दिया था:

आबिद
जावेद
रंजीत पाल
अब्दुल कवि
गुलहसन
फरहान

सभी को आजीवन कारावास के साथ 1.90 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त 14 माह के कारावास का प्रावधान रखा गया था।

मामले की सुनवाई जारी

हाईकोर्ट द्वारा आबिद को जमानत दिए जाने के बावजूद मामले की अपील पर अंतिम सुनवाई अभी शेष है। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

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