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National: लद्दाख में सेना का ‘चीता हेलीकॉप्टर’ क्रैश, डिवीजन कमांडर मेजर जनरल सचिन मेहता और दोनों पायलट घायल

लेह : भारतीय सेना का एक चीता लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर 20 मई को लद्दाख के बेहद दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हाई-प्रोफाइल हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार डिवीजन कमांडर मेजर जनरल सचिन मेहता और दोनों पायलट गंभीर रूप से जख्मी हो गए। राहत की बात यह है कि सेना की त्वरित रेस्क्यू टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी घायलों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया और वर्तमान में सभी की हालत स्थिर व खतरे से बाहर बताई जा रही है।रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और ऊंचाई वाले इस इलाके में हुए हादसे को सेना मुख्यालय ने बेहद गंभीरता से लिया है।

दुर्गम घाटी में हुआ हादसा, तुरंत शुरू हुआ ‘एयर रेस्क्यू’

सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह दुर्घटना लद्दाख सेक्टर के एक अत्यंत अग्रिम और ऊंचे पर्वतीय इलाके में हुई।लद्दाख का यह क्षेत्र अपनी कठिन भौगोलिक संरचना और पल-पल बदलते खराब मौसम के लिए जाना जाता है। हेलीकॉप्टर के क्रैश होते ही सेना का आपदा राहत और आपातकालीन दस्ता एक्टिव हो गया। खोजी हेलीकॉप्टर्स और ग्राउंड ट्रूप्स की मदद से दुर्घटनास्थल का पता लगाया गया और मलबे में फंसे मेजर जनरल सचिन मेहता व दोनों सैन्य पायलटों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित मिलिट्री हॉस्पिटल पहुंचाया गया।

सैनिकों और रसद आपूर्ति की ‘लाइफलाइन’ है चीता हेलीकॉप्टर

भारतीय सेना में ‘चीता हेलीकॉप्टर्स’ का इतिहास दशकों पुराना है और इन्हें सियाचिन व लद्दाख जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों का ‘वर्कहॉर्स’ माना जाता है। इन हल्के हेलीकॉप्टर्स का मुख्य उपयोग दुर्गम चौकियों तक सैनिकों को लाने-ले जाने, आवश्यक रसद और जीवन रक्षक दवाइयां पहुंचाने, सीमाओं की टोह लेने तथा आपातकालीन चिकित्सा उड़ानों के लिए किया जाता है।हालांकि, यह हादसा एक बार फिर सेना के इन पुराने हो रहे हेलीकॉप्टर बेड़ों की सुरक्षा और उनके आधुनिकीकरण की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करता है।

कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश: तकनीकी खराबी या मौसम?

हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए भारतीय सेना द्वारा एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई है। सेना की तकनीकी टीम और विमानन विशेषज्ञ घटना की गहन कड़ियों को जोड़ रहे हैं। कमेटी मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल कर रही है कि यह दुर्घटना किसी अचानक आई तकनीकी खराबी , इंजन फेल्योर, मौसम की खराबी (खराब विजिबिलिटी/तेज हवा) या फिर लैंडिंग के वक्त ‘व्हाइट-आउट’ (बर्फ के कारण कुछ न दिखना) की स्थिति उत्पन्न होने की वजह से हुई। सेना का कहना है कि ब्लैक बॉक्स और विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम कारणों की पुष्टि हो पाएगी।

सैन्य अस्पताल में चल रहा है इलाज, स्थिति खतरे से बाहर

लद्दाख जैसे संवेदनशील और एलएसी से सटे इलाकों में सेना के कमांडर लगातार फॉरवर्ड पोस्ट्स का दौरा कर परिचालन तैयारियों का जायजा लेते रहते हैं। मेजर जनरल सचिन मेहता भी इसी सिलसिले में हवाई निरीक्षण पर थे।सेना के प्रवक्ता ने आश्वस्त किया है कि मिलिट्री हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में डिवीजन कमांडर और दोनों जांबाज पायलटों का बेहतरीन इलाज चल रहा है।

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