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Madhya Pradesh: ट्विशा शर्मा केस पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, सोमवार को होगी सुनवाई

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्य कान्त की अगुआई में तीन जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली भी शामिल हैं।

संस्थागत भेदभाव और प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप

सुप्रीम कोर्ट में शनिवार शाम 6:23 बजे यह मामला दर्ज किया गया। इसमें ट्विशा शर्मा की ससुराल में हुई अप्राकृतिक मौत को लेकर कथित संस्थागत भेदभाव और न्यायिक प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों पर सुनवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी सोमवार को सुनवाई

इधर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी सोमवार को इस मामले से जुड़ी सुनवाई होनी है। हाईकोर्ट ट्विशा की सास और पूर्व जज राजबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा। इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से याचिका दायर की गई है।

पति समर्थ सिंह के समर्थन में सिस्टम होने का आरोप

ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उसका पति समर्थ सिंह फरार बताया जा रहा था। शुक्रवार को वह जबलपुर हाईकोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा। इस दौरान मीडिया कवरेज रोकने और धक्का-मुक्की की खबरें सामने आईं।ट्विशा के जीजा ने आरोप लगाया कि पूरा सिस्टम समर्थ सिंह के समर्थन में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि समर्थ सिंह सुबह से जबलपुर में मौजूद था, लेकिन पुलिस और एसआईटी उसे पकड़ नहीं सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समर्थ सिंह के खिलाफ लुकआउट नोटिस और 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था, तब भी उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।

वकीलों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी का आरोप

मामले में एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कोर्ट परिसर में समर्थ सिंह को देखा और पूछताछ की, तो उसके साथ मौजूद लोगों ने पहले पहचान से इनकार किया और बाद में उसे वहां से भगाने की कोशिश की।उन्होंने कहा कि कई लोगों ने मीडिया कर्मियों और वकीलों के साथ धक्का-मुक्की की तथा उन्हें कोर्ट परिसर से बाहर निकाल दिया गया। अनुराग श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि उनके साथ गाली-गलौज और हाथापाई भी की गई।

कोर्ट परिसर में आरोपी की मौजूदगी पर उठे सवाल

एडवोकेट अनुराग श्रीवास्तव ने यह भी सवाल उठाया कि आरोपी समर्थ सिंह कोर्ट रूम में वकीलों के लिए रखी कुर्सियों पर कैसे बैठा था। उन्होंने कहा कि यदि सरेंडर स्वीकार नहीं किया गया था, तो आरोपी को पुलिस कस्टडी में लिया जाना चाहिए था।उन्होंने दावा किया कि कोर्ट रूम में आरोपी अकेला बैठा था, कमरे की लाइट बंद थी लेकिन एसी और पंखे चल रहे थे। जब कोर्ट स्टाफ से इस संबंध में सवाल किए गए तो वहां अफरा-तफरी मच गई।

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