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Bihar: बिहार में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगी रोक, फीस और यूनिफॉर्म नियमों पर सरकार सख्त

बिहार में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निजी स्कूलों में फीस वृद्धि, किताब और यूनिफॉर्म खरीद जैसे मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और सभी के लिए सुलभ बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी आदेशों का पालन नहीं करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फीस और अन्य शुल्क की जानकारी सार्वजनिक करना होगा अनिवार्य

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार निजी विद्यालयों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नई पहल कर रही है। इसके तहत सभी निजी स्कूलों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।सरकार मनमानी फीस वृद्धि और अनावश्यक शुल्क पर रोक लगाएगी। इसके अलावा अभिभावकों को किताबें और यूनिफॉर्म अपनी पसंद की दुकान से खरीदने की स्वतंत्रता दी जाएगी।

फीस बकाया होने पर नहीं रोका जाएगा रिजल्ट

नई व्यवस्था के तहत छात्रों को फीस बकाया होने की स्थिति में परीक्षा परिणाम से वंचित नहीं किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि किसी भी छात्र के साथ इस प्रकार का व्यवहार नहीं होना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि कोई स्कूल इन आदेशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी बनी चिंता

बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में अभिभावक निजी स्कूलों पर निर्भर हो गए हैं। आरोप है कि कई निजी स्कूल शिक्षा संस्थान से ज्यादा व्यवसायिक केंद्र बन गए हैं।हर साल री-एडमिशन, मिसलेनियस और एनुअल चार्ज के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता है। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन अक्सर किताब, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्रियों की खरीद के लिए तय दुकानों से सामान लेने का दबाव बनाते हैं।हर नए सत्र में किताबों में मामूली बदलाव कर नई किताबें खरीदने के लिए भी अभिभावकों को मजबूर किया जाता है। इस साल भी राज्य के कई जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जिसके बाद जिला प्रशासन स्तर पर कार्रवाई भी की गई।

सरकार बनाएगी नई व्यवस्था

इन शिकायतों और अभिभावकों की परेशानियों को देखते हुए बिहार सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। सरकार का दावा है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों को राहत मिलेगी।

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