गोंडा : उत्तर प्रदेश के गोंडा जिला मुख्यालय से सटे पथवलिया गांव में शुक्रवार सुबह एक हृदयविदारक घटना घटी। बिजली विभाग की घोर लापरवाही के कारण एक जर्जर हाईटेंशन तार टूटकर गिरने से युवा पत्रकार रंजीत तिवारी की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने विभाग की कार्यप्रणाली और जर्जर बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दूसरों को बचाने की कोशिश में खुद हुए शिकार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब पौने नौ बजे रंजीत तिवारी अपने घर के पास थे। तभी उन्होंने देखा कि पास के जर्जर तार से चिंगारियां निकल रही हैं।खतरे को भांपते हुए रंजीत तुरंत पड़ोसी को सचेत करने पहुंचे और उन्हें उस रास्ते से न निकलने की सलाह दी।जैसे ही वे पड़ोसी को सचेत कर वापस लौटे, अचानक हाईटेंशन तार टूटकर उनके ऊपर गिर गया। करंट की चपेट में आने से रंजीत बुरी तरह झुलस गए और उनकी तत्काल मौत हो गई।
बिजली काटने के बजाय मांगते रहे ‘आधार कार्ड’
ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर संवेदनहीनता का बड़ा आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि घटना के तुरंत बाद सप्लाई बंद कराने के लिए फोन किया गया, लेकिन विभागीय कर्मचारी सहायता करने के बजाय आधार कार्ड की मांग करते रहे। न तो लाइन ट्रिप हुई और न ही अभियंताओं ने समय पर फोन उठाया। अंततः एक ग्रामीण त्रिलोकी नाथ मिश्रा ने जान जोखिम में डालकर बांस के सहारे तार को हटाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मुख्य अभियंता समेत पांच अधिकारियों पर एफआईआर
घटना के बाद जिले के आला अधिकारी—डीएम प्रियंका निरंजन और एसपी विनीत जायसवाल—मौके पर पहुंचे। मृतक के भाई अमरजीत तिवारी की तहरीर पर नगर कोतवाली में मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, उप खंड अधिकारी और अवर अभियंता के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या (IPC/BNS की संबंधित धाराओं) का मुकदमा दर्ज किया गया है।डीएम ने पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये का अहेतुक मुआवजा, पत्नी को नौकरी और मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं।
10 साल से लंबित था जर्जर तार हटाने का काम
ग्रामीणों में आक्रोश है कि स्कूल के ऊपर से गुजर रहे इस जर्जर तार को हटाने के लिए पिछले एक दशक से शिकायतें की जा रही थीं। महीनों पहले इसका टेंडर भी जारी हुआ था, लेकिन विभागीय सुस्ती के कारण काम शुरू नहीं हुआ। गनीमत यह रही कि तार पास के उच्च प्राथमिक विद्यालय पर नहीं गिरा, अन्यथा दर्जनों बच्चों की जान जा सकती थी।देवीपाटन जोन के मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने माना कि जर्जर तारों को न हटाना एक बड़ी चूक है और जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तय है।
