रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले से एक दंपति द्वारा गैरकानूनी तरीके से नवजात बच्चे को गोद लेने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करीब तीन महीने के बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है।
ग्रामीणों को हुआ शक, प्रशासन को दी सूचना
मिली जानकारी के अनुसार, कुजू ओपी क्षेत्र के पूर्वी न्यू कॉलोनी निवासी महेंद्र महतो और उनकी पत्नी के घर में करीब तीन महीने के बच्चे को देखकर स्थानीय ग्रामीणों को संदेह हुआ। ग्रामीणों को जब इस बच्चे के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली तो किसी ने इसकी सूचना जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी शांति बागे को दे दी।सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी।
प्रशासन और चाइल्डलाइन टीम ने किया रेस्क्यू
जिला प्रशासन की टीम, जिसमें विधि सह प्रवेक्षा पदाधिकारी रंजीत कुमार, चाइल्डलाइन समन्वयक पुष्पा कुमारी और सामाजिक कार्यकर्ता रेमन पंकज शामिल थे, पुलिस के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने स्थिति का जायजा लेने के बाद बच्चे को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
सादे कागज पर समझौते से लाया गया था बच्चा
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह बच्चा धनबाद के एक दंपति से सादे कागज पर लिखित समझौते के जरिए लाया गया था। अधिकारियों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से अवैध है, क्योंकि भारत में बच्चे को गोद लेने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है।
बाल संरक्षण विभाग की निगरानी में रखा गया बच्चा
अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल बच्चे को बाल संरक्षण विभाग की देखरेख में रखा गया है। यहां उसकी सुरक्षा, देखभाल और स्वास्थ्य की निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
अवैध गोद लेने की प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद अवैध तरीके से बच्चों को गोद लेने की घटनाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला प्रशासन ने ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।
