Jharkhand: ‘नहाय-खाय’ के साथ लोक आस्था के महापर्व चैती छठ का शुभारंभ, लौकी-भात ग्रहण कर व्रतियों ने शुरू किया चार दिवसीय अनुष्ठान

जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ आज से श्रद्धा और भक्ति के साथ शुरू हो गया। चार दिनों तक चलने वाले इस पवित्र पर्व की शुरुआत व्रती महिलाओं ने नहाय-खाय के साथ की। छठ व्रती महिलाओं ने सुबह स्नान कर भगवान सूर्य और छठी मैया का स्मरण करते हुए लौकी-भात ग्रहण कर व्रत की शुरुआत की।चैती छठ का यह पर्व पूरे पूर्वांचल और झारखंड में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जमशेदपुर के विभिन्न इलाकों में भी श्रद्धालुओं के बीच इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।
नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ चार दिवसीय छठ पर्व
चैती छठ के पहले दिन को नहाय-खाय कहा जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं सुबह स्नान कर घर की साफ-सफाई के बाद शुद्ध भोजन के रूप में लौकी-भात ग्रहण करती हैं। इसी के साथ चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत की शुरुआत हो जाती है।
खरना के दिन शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत
छठ पर्व के दूसरे दिन खरना मनाया जाएगा। इस दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को पूजा-अर्चना करती हैं और गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता।
डूबते और उगते सूर्य को दिया जाता है अर्घ्य
छठ पर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाएं नदी, तालाब या छठ घाटों पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। वहीं चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह पर्व संपन्न होता है।
कठिन व्रतों में से एक माना जाता है चैती छठ
चैती छठ को हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है, वे छठी मैया के प्रति आस्था जताते हुए चैती छठ का व्रत रखते हैं। हालांकि अब बड़ी संख्या में लोग नियमित रूप से भी यह व्रत करने लगे हैं।
छठ घाटों की सफाई और तैयारी शुरू
जमशेदपुर के विभिन्न छठ घाटों और जलाशयों पर भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। स्थानीय समितियां और प्रशासन घाटों की साफ-सफाई और रोशनी की व्यवस्था में जुटे हुए हैं ताकि व्रतियों को पूजा-अर्चना में किसी प्रकार की परेशानी न हो।



