उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ 2028 के भव्य और सुचारु आयोजन को लेकर उज्जैन जिला प्रशासन और नगर निगम एक्शन मोड में है। बुधवार अलसुबह सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। नगर निगम के बुलडोजरों ने नृसिंह घाट से लेकर लालपुल ब्रिज तक के मार्ग पर बने कई अवैध और स्थायी निर्माणों को ढहा दिया।
2016 के बाद बने निर्माणों पर गिरी गाज
नगर निगम प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2016 के बाद इस क्षेत्र में जितने भी पक्के और स्थायी निर्माण हुए हैं, उन्हें चिन्हित कर लिया गया है।प्रशासन ने पहले ही निर्माणकर्ताओं को नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने की मोहलत दी थी।समय सीमा बीतने के बाद भी जब निर्माण नहीं हटाए गए, तो बुधवार सुबह निगम की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू की।
नृसिंह घाट रोड पर हड़कंप: बड़े आश्रम भी जद में
नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा और अपर आयुक्त संतोष टैगोर की निगरानी में हुई इस कार्रवाई में कई बड़े स्ट्रक्चर हटाए गए जिसमे नरसिंह घाट रोड पर स्थित लगभग 60×80 फीट के माधवानंद आश्रम के स्थायी हिस्से को ढहाया गया।करीब 80×150 फीट क्षेत्र में फैली कलोता समाज धर्मशाला के अवैध निर्माण को भी निगम ने हटा दिया। सिंहस्थ मेले के दौरान साधु-संतों के डेरे, टेंट और लाखों श्रद्धालुओं की पार्किंग के लिए पर्याप्त खुली जगह सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
29 किमी तक घाटों का होगा कायाकल्प
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सिंहस्थ 2028 के लिए शिप्रा नदी के घाटों का 29 किलोमीटर तक विस्तार प्रस्तावित है। सड़क चौड़ीकरण और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए इन क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त रखना आवश्यक है।
आगामी दिनों में भी जारी रहेगी कार्रवाई
नगर निगम आयुक्त ने कड़े लहजे में कहा कि सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है। 2016 के बाद बने सभी स्थायी स्ट्रक्चर अवैध हैं और उन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। आने वाले दिनों में अन्य चिन्हित स्थानों पर भी इसी तरह का अभियान चलाया जाएगा ताकि सिंहस्थ 2028 का आयोजन विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप हो सके।
