रांची: हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार ने अपने कार्यकाल का दूसरा बजट पेश करते हुए एक बार फिर सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखा है. सरकार ने इस बजट को प्रतीकात्मक रूप से “झारखंड की मईया” को समर्पित बताया है, जिसका आशय राज्य की माताओं, बहनों, बुजुर्गों और जरूरतमंद वर्गों के सशक्तिकरण से है. बजट दस्तावेजों के अनुसार इस बार सबसे अधिक 16.75 प्रतिशत राशि समाज कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा पर खर्च करने का प्रावधान किया गया है.
आय के स्रोत, कहां से आएगा रुपया?
राज्य सरकार की कुल आय में सबसे बड़ा हिस्सा केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 32.31 प्रतिशत का है. इसके बाद राज्य के अपने कर 29.02 प्रतिशत प्रमुख स्रोत हैं. उधार के माध्यम से 13.91 प्रतिशत संसाधन जुटाए जाएंगे, जबकि राज्य के अपने गैर-कर राजस्व से 13.05 प्रतिशत आय का अनुमान है. केंद्र से मिलने वाले अनुदान 11.52 प्रतिशत भी बजट का महत्वपूर्ण आधार हैं. वहीं ऋण व अग्रिम की वसूली से 0.19 प्रतिशत आय प्राप्त होने का अनुमान है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य की वित्तीय संरचना में केंद्र पर निर्भरता के साथ-साथ अपने संसाधनों का भी अहम योगदान है.
खर्च का खाका, प्राथमिकता में सामाजिक सुरक्षा
खर्च के मदों में समाज कल्याण 16.75 प्रतिशत को सबसे ऊपर रखा गया है. इसके अंतर्गत पेंशन, छात्रवृत्ति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं शामिल हैं. दूसरे स्थान पर ग्रामीण विकास 12.43 प्रतिशत है, जिसमें पंचायती राज संस्थाओं को भी शामिल किया गया है. सरकार का जोर गांवों में बुनियादी ढांचा और रोजगार सृजन पर है.
शिक्षा पर 11.87 प्रतिशत और स्वास्थ्य एवं पेयजल पर 8.32 प्रतिशत खर्च का प्रावधान किया गया है. यह मानव संसाधन विकास और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. ऊर्जा क्षेत्र को 7.06 प्रतिशत, जबकि भूमि राजस्व, श्रम, पर्यटन और आईटी समेत अन्य क्षेत्रों को 7.93 प्रतिशत आवंटित किए गए हैं.
इसके अलावा पुलिस एवं आपदा प्रबंधन 6.89 प्रतिशत, पेंशन 6.29 प्रतिशत, ऋण अदायगी 5.74 प्रतिशत, ब्याज भुगतान 4.11 प्रतिशत, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र 4.79 प्रतिशत, सड़क एवं परिवहन 4.38 प्रतिशत, शहरी विकास एवं आवास 2.47 प्रतिशत तथा वन एवं पर्यावरण 0.97 प्रतिशत पर भी खर्च का प्रावधान किया गया है.
बजट का संदेश
सरकार का यह बजट सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की नीति को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है. समाज कल्याण को सर्वाधिक प्राथमिकता देकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि कमजोर और वंचित वर्गों की सुरक्षा उसकी मुख्य चिंता है. साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर पर्याप्त आवंटन से यह संकेत मिलता है कि दीर्घकालिक विकास और आधारभूत ढांचे को भी समान महत्व दिया जा रहा है.
कुल मिलाकर, हेमंत सोरेन सरकार का दूसरा बजट सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण उन्नति पर केंद्रित संतुलित वित्तीय खाका पेश करता है. इसका लक्ष्य राज्य के व्यापक सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है.
