Bihar: प्रशांत किशोर का चुनाव आयोग को 24 घंटे का अल्टीमेटम, जीविका दीदियों के चुनावी इस्तेमाल का लगाया आरोप

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होना है। चुनाव प्रचार के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए भारत निर्वाचन आयोग को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं की गई तो जन सुराज चुनाव आयोग के समक्ष धरना देगा।
जीविका दीदियों के चुनावी इस्तेमाल का लगाया आरोप
रविवार को प्रेस वार्ता में प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि सरकार जीविका दीदियों के नेटवर्क का चुनावी लाभ के लिए उपयोग कर रही है। उनका दावा है कि उन्हें चुनावी प्रक्रिया से दूर रखा जाना चाहिए क्योंकि वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं।उन्होंने कहा कि जन सुराज का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलकर इस संबंध में औपचारिक शिकायत करेगा और जीविका दीदियों को चुनावी गतिविधियों से अलग रखने की मांग करेगा।
‘मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास’ का दावा
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि जीविका दीदियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और बूथों पर सेवाओं के नाम पर मतदाताओं के संपर्क में लाया जाता है तथा उनके माध्यम से सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रभावित किया जाता है।उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं के बीच यह संदेश फैलाया जाता है कि यदि सत्ताधारी दल का उम्मीदवार हार गया तो सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित हो सकता है।
भाजपा पर भी साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी बांकीपुर उपचुनाव में कमजोर स्थिति में है, इसलिए पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेता चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
डीएम से आदेश जारी करने की मांग
जन सुराज प्रमुख ने कहा कि जिला प्रशासन को स्पष्ट आदेश जारी कर जीविका दीदियों को चुनावी प्रक्रिया से अलग करना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में आयोजित सरकारी कार्यक्रमों में सरकारी खर्च पर जीविका दीदियों को शामिल किया गया।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान हैं। इस संबंध में चुनाव आयोग, बिहार सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है। यदि आयोग को शिकायत प्राप्त होती है, तो वह उपलब्ध तथ्यों और चुनावी नियमों के अनुसार निर्णय ले सकता है।



