Jharkhand INFACTNews

Jharkhand: जेपीएससी परीक्षा घोटाला मामले में कोर्ट के आदेश में सुधार, आरोपी के पिता के परीक्षा देने की जानकारी निकली गलत

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के संचालन से जुड़े कथित अनियमितता मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। परीक्षा संचालन एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी के पिता सुखदेव तिवारी के जेपीएससी की परीक्षाओं में शामिल होने संबंधी जानकारी गलत पाई गई है।रांची स्थित सीआईडी की विशेष अदालत ने 5 सितंबर के अपने आदेश में सुधार करते हुए मंगलवार को संशोधित आदेश जारी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुखदेव तिवारी के जेपीएससी परीक्षाओं में शामिल होने संबंधी उल्लेख टाइपिंग एरर के कारण आदेश में आया था। संशोधित आदेश में कहा गया है कि 5 सितंबर के आदेश के बाकी तथ्य यथावत रहेंगे।

कोर्ट के पुराने आदेश में क्या था उल्लेख?

5 सितंबर के आदेश में कहा गया था कि अभय कुमार तिवारी ने स्वयं जेपीएससी और जेएसएससी की कई परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी और अपनी पत्नी, भाई समेत कई रिश्तेदारों को भी नौकरी दिलाई थी।इसी आदेश में यह भी उल्लेख था कि उसके पिता सुखदेव तिवारी ने जेपीएससी की दो परीक्षाओं में हिस्सा लिया था। इनमें फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर प्रारंभिक परीक्षा 2024 और असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट प्रारंभिक परीक्षा 2024 शामिल थीं।संशोधित आदेश में अदालत ने इस हिस्से को गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि अभय तिवारी के पिता सुखदेव तिवारी से संबंधित यह जानकारी सही नहीं है।

सीआईडी की जांच में परीक्षा सिंडिकेट का दावा

मामले की जांच कर रही सीआईडी ने अदालत में दाखिल अपनी 19 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में एक कथित सुनियोजित सिंडिकेट का जिक्र किया है।रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी को ऐसे नेटवर्क के सक्रिय होने की जानकारी मिली है, जो कथित तौर पर जालसाजी और सेटिंग के माध्यम से अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने का काम करता था।सीआईडी के अनुसार, इस कथित सिंडिकेट द्वारा प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए करीब 5 लाख रुपये और अंतिम चयन के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक की रकम लिए जाने की बात सामने आई है।

अभ्यर्थियों से लिए जाते थे शैक्षणिक प्रमाण पत्र और ब्लैंक चेक

सीआईडी ने अदालत को बताया कि अभ्यर्थियों द्वारा चयन के बाद पैसे देने के वादे से पीछे न हटने के लिए कथित सिंडिकेट के सदस्य सुरक्षा के तौर पर उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक, स्टांप पेपर और हस्ताक्षरयुक्त कागजात जमा कराते थे।जांच एजेंसी का दावा है कि इस तरीके का इस्तेमाल कथित तौर पर अभ्यर्थियों पर आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए किया जाता था।

पहले ब्लैकलिस्ट, फिर उसी एजेंसी से कराया गया परीक्षा संचालन

सीआईडी ने अदालत को बताया कि जेपीएससी ने परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल को 20 मई 2025 को अनियमितता के मामले में ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद जून 2025 में कथित तौर पर इसी एजेंसी से संवेदनशील परीक्षाओं का संचालन कराया गया।जांच एजेंसी के अनुसार, इस दौरान परीक्षा संचालन के लिए जेपीएससी की निविदा शर्तों के अनुपालन को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।

आपत्ति करने वाले परीक्षा नियंत्रक को हटाने का आरोप

सीआईडी की जांच के अनुसार, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने एजेंसी को लेकर आपत्ति जताई थी। आरोप है कि तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय असीम किस्पोट्टा को परीक्षा संबंधी कार्य से हटा दिया और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को जिम्मेदारी सौंप दी।यह जांच एजेंसी द्वारा अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों का हिस्सा है।

मूल उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर का सीआईडी का दावा

सीआईडी ने आगे की जांच में टीडीपीएल के निदेशक समरपाल सिंह और रणवीर सिंह समेत अन्य कर्मियों पर कथित तौर पर परीक्षा में गड़बड़ी की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा केंद्रों और जेपीएससी कार्यालय से मूल उत्तर पुस्तिकाएं बाहर ले जाकर दोबारा लिखवाने की बात सामने आई है।सीआईडी के मुताबिक, एफआरओ प्रारंभिक परीक्षा में करीब 350 और एसीएफ परीक्षा में 150 से अधिक ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी की गई।जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 की आधिकारिक उत्तर कुंजी जारी होने से पहले ही तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ने अपने व्हाट्सप्प नंबर से उसे टीडीपीएल के एक कर्मी को भेज दिया था।

सरकारी लैपटॉप और पेन ड्राइव से डिजिटल साक्ष्य मिटाने का आरोप

सीआईडी ने अदालत को बताया कि 22 जुलाई 2026 को जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी की छापेमारी के बाद तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।जांच एजेंसी के अनुसार, इसके बाद खियांग्ते अपने पास मौजूद सरकारी लैपटॉप और पेन ड्राइव लेकर चले गए। बाद में सीआईडी ने इन डिजिटल उपकरणों को जब्त कर फोरेंसिक जांच कराई।सीआईडी का दावा है कि फोरेंसिक जांच में लैपटॉप और पेन ड्राइव से डिजिटल साक्ष्य मिटाने के प्रयास के संकेत मिले। जांच एजेंसी के अनुसार, स्टोरेज के साथ छेड़छाड़ और डेटा डिलीट किए जाने की बात सामने आई है।

संशोधित आदेश से एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट

अदालत के संशोधित आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि सुखदेव तिवारी के जेपीएससी की दो परीक्षाओं में शामिल होने संबंधी तथ्य को अदालत ने गलत और टाइपिंग एरर माना है। हालांकि, अदालत ने 5 सितंबर के आदेश में दर्ज अन्य तथ्यों को यथावत रखा है।जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में सीआईडी की जांच और अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button