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Jharkhand:जमशेदपुर के गोपाल मैदान में ‘राजस्थान महोत्सव’ का शानदार शंखनाद, संजय मुकुंदगढ़ के भजनों से महकी जमशेदपुर की फिजा

जमशेदपुर : बिष्टुपुर का गोपाल मैदान रविवार शाम को मारवाड़ के ऐतिहासिक वैभव का गवाह बना। जैसे ही महोत्सव के द्वार आम जनता के लिए खोले गए, मानो पूरा राजस्थान सिमटकर जमशेदपुर आ गया हो। उद्घाटन सत्र के साथ ही पूरा परिसर राजस्थानी लोक गीतों, सतरंगी रोशनी और माटी की सौंधी खुशबू से महक उठा।

विधायक सरयू राय ने दीप प्रज्वलित कर किया उद्घाटन

महोत्सव का आधिकारिक और भव्य शुभारंभ मुख्य अतिथि जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक व पूर्व मंत्री सरयू राय ने दीप प्रज्वलित कर किया। (बता दें कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार के हाथों उद्घाटन होना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से स्थानीय विधायक सरयू राय ने कमान संभाली)।इस अवसर पर शहरवासियों और मारवाड़ी समाज को बधाई देते हुए सरयू राय ने कहा “राजस्थान की संस्कृति त्याग, शौर्य और आतिथ्य सत्कार की अनूठी मिसाल है। जमशेदपुर जैसे बहुसांस्कृतिक शहर में ऐसे आयोजनों का होना बेहद गौरव की बात है। यह मेला न केवल राजस्थान की समृद्ध कला और परंपराओं को जीवंत रखता है, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सौहार्द, सामाजिक समरसता और भाईचारे के ताने-बाने को और मजबूत करता है।”

पहले ही दिन उमड़ी भीड़; संजय मुकुंदगढ़ की सुरमयी प्रस्तुति ने बांधा समां

महोत्सव के पहले ही दिन शहरवासियों का उत्साह चरम पर देखा गया। उद्घाटन के बाद सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत राजस्थान के ख्यातिप्राप्त लोक गायक संजय मुकुंदगढ़ की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और सुरीली आवाज में जब राजस्थान के लोक गीतों और मरुधरा की गाथाओं को पेश किया, तो पंडाल में मौजूद हर व्यक्ति झूमने पर मजबूर हो गया। पहली बार शहर के लोगों को एक ही छत के नीचे राजस्थानी संस्कृति का इतना सघन और सतरंगी अनुभव मिला।

‘मिनी जैसलमेर’ और पारंपरिक खान-पान बने आकर्षण के केंद्र

तीन दिनों (17, 18 और 19 मई) तक चलने वाले इस मेले में पहले ही दिन कई खास स्टॉल और सेल्फी पॉइंट लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। विशेष रूप से तैयार किए गए रेत के टीले और ऊंट की सवारी ने बच्चों और परिवारों को आकर्षित किया, जो बिल्कुल ‘मिनी जैसलमेर’ का लुक दे रहा था। ‘चोखी ढाणी’ की तर्ज पर सजे फूड ज़ोन में लोगों ने पारंपरिक अंदाज में बैठकर शुद्ध घी से बने प्रसिद्ध दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी और मिर्ची वड़े का लुत्फ उठाया। मेले में लगाए गए हस्तशिल्प, जयपुरी जूतियां, लाख की चूड़ियां, और कठपुतली नृत्य को देखने के लिए महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी।

अगले दो दिनों में ये होंगे मुख्य आकर्षण

आयोजन समिति ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। 18 मई को प्रसिद्ध थिएटर ग्रुप ‘दर्पण टॉक्स’ द्वारा हास्य-व्यंग्य से भरपूर मारवाड़ी नाटक “शेक्सपियर म्हारो जमाई” का मंचन होगा।19 मई को लोक संगीत सम्राज्ञी सीमा मिश्रा की सुरीली आवाज के साथ इस तीन दिवसीय ऐतिहासिक महोत्सव का समापन होगा।

आयोजकों की अपील

पूर्वी सिंहभूम जिला मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारियों ने तमाम जमशेदपुरवासियों से सपरिवार गोपाल मैदान पहुंचने की अपील की है, ताकि लोग इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बन सकें और राजस्थान के गौरवशाली आतिथ्य का आनंद ले सकें।

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