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Delhi: मुझे बोलना से रोकना लोकतंत्र पर काला धब्बा”, राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिख सरकार पर जड़ा गंभीर आरोप

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान मंगलवार (3 फरवरी) को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव चरम पर पहुँच गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को एक कड़ा पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उन्हें सदन में बोलने से जानबूझकर रोका जा रहा है। राहुल गांधी ने इस स्थिति को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक “काला धब्बा” करार दिया है।

चीन और जनरल नरवणे के लेख पर मचा बवाल

सदन में गतिरोध तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों पर आधारित एक लेख का हवाला देते हुए चीन सीमा विवाद का मुद्दा उठाना चाहा।राहुल गांधी ने कहा कि सोमवार को अध्यक्ष के निर्देशानुसार उन्होंने उस लेख को सत्यापित कर सदन के पटल पर रख दिया था।दस्तावेज सत्यापित करने के बावजूद आसन ने उन्हें इस विषय पर बोलने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद राहुल गांधी ने स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी के पत्र की 3 बड़ी बातें

स्पीकर ओम बिरला को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने कई तीखे सवाल किए हैं

  1. संसदीय परंपरा का उल्लंघन: राहुल ने तर्क दिया कि जब कोई सदस्य किसी दस्तावेज को सत्यापित कर उसकी जिम्मेदारी ले लेता है, तो अध्यक्ष उसे संदर्भित करने की अनुमति देते हैं। इसके बाद जवाब देना सरकार का काम है, अध्यक्ष का नहीं। उन्हें रोकना स्थापित संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
  2. राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा से रोकने की आशंका: पत्र में लिखा गया है, “मुझे जानबूझकर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर बोलने से रोका जा रहा है। जबकि राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिस पर चर्चा अनिवार्य है।”
  3. सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप: राहुल गांधी ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के दबाव में नेता प्रतिपक्ष की आवाज को दबाया गया है। उन्होंने इसे बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

“अध्यक्ष की भूमिका पर उठाए सवाल”

कांग्रेस नेता ने पत्र में याद दिलाया कि सदन के संरक्षक के रूप में लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी विपक्ष के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रत्येक सदस्य का बोलने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है और इसे दरकिनार करना एक “अभूतपूर्व संकट” पैदा कर रहा है।

सदन में गतिरोध बरकरार

राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। जहाँ कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी के दावों को निराधार बताते हुए उन पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है।

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