Jharkhand: सम्मेद शिखरजी में दो दिवसीय धर्म सम्मेलन का भव्य शुभारंभ, मरांग बुरु की पूजा-अर्चना में जुटे देश-विदेश के आदिवासी प्रतिनिधि

गिरिडीह: विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल सम्मेद शिखरजी के मधुबन स्थित तलहटी क्षेत्र में बुधवार को मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय धर्म सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। सम्मेलन की शुरुआत जुग जाहेर थान में स्थापित मरांग बुरु की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग जुटे और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अपने आराध्य मरांग बुरु के प्रति श्रद्धा प्रकट की।पूजा-अर्चना का नेतृत्व हेमंत सरकार के दर्जा प्राप्त मंत्री फागू बेसरा ने किया। उनके नेतृत्व में आदिवासी समाज के पुजारियों ने पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इसके साथ ही दो दिवसीय धर्म सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। आयोजन को लेकर आदिवासी समाज के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
झारखंड समेत कई राज्यों और नेपाल से पहुंचे प्रतिनिधि
इस धर्म सम्मेलन में झारखंड के सभी जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम से आदिवासी समाज के प्रतिनिधि शामिल होने पहुंचे हैं। वहीं, नेपाल से भी प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विभिन्न राज्यों और नेपाल से आए प्रतिनिधियों की भागीदारी ने सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
मरांग बुरु की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने पर जोर
पूजा-अर्चना के बाद मधुबन की तलहटी में धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न वक्ताओं ने मरांग बुरु की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता पर अपने विचार रखे।वक्ताओं ने कहा कि धर्म सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के बीच मरांग बुरु के प्रति आस्था, श्रद्धा और भक्ति की भावना को और मजबूत करना है। इसके साथ ही समाज की धार्मिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए लोगों को जागरूक करना भी सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य है।वक्ताओं ने कहा कि मरांग बुरु आदिवासी समाज की आस्था और पहचान से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनकी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के संरक्षण के लिए गंभीर पहल किए जाने की जरूरत है।
राज्य सरकार से सकारात्मक पहल की जाएगी मांग
सम्मेलन के माध्यम से राज्य सरकार से भी अपील की जाएगी कि वह मरांग बुरु से जुड़े विषयों को गंभीरता से ले और आदिवासी समाज की भावनाओं एवं मांगों पर सकारात्मक पहल करे।दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा करेंगे। आयोजन को लेकर मधुबन क्षेत्र में आदिवासी समाज के लोगों की अच्छी-खासी उपस्थिति देखी गई।कार्यक्रम में महावीर मुर्मू, दिलीप मुर्मू, शशांक बेसरा, महेश मरांडी सहित मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति के कई सदस्य और आदिवासी समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे।



