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Jharkhand: आदिवासी महिला सिपाही से जुड़े पुराने मामले के बीच पवन कुमार की थाना प्रभारी के रूप में पोस्टिंग पर उठे सवाल,संगठन ने डीजीपी से की हस्तक्षेप की मांग

जमशेदपुर: झारखंड आदिवासी युवा संगठन और आदिवासी छात्र संगठन ने धालभूमगढ़ थाना में कार्यरत रही एक आदिवासी महिला सिपाही से जुड़े पुराने मामले का हवाला देते हुए पुलिस पदाधिकारी पवन कुमार को दोबारा थाना प्रभारी बनाए जाने पर आपत्ति जताई है। संगठन ने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर श्यामसुंदरपुर थाना प्रभारी के रूप में उनकी पदस्थापना की समीक्षा करने की मांग की है।उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पवन कुमार ने सितंबर 2026 में श्यामसुंदरपुर थाना प्रभारी के रूप में प्रभार ग्रहण किया है।

2025 में धालभूमगढ़ में सामने आया था मामला

संगठन का दावा है कि वर्ष 2025 में धालभूमगढ़ थाना में पदस्थापित एक आदिवासी महिला सिपाही से जुड़े मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे। संगठन के अनुसार, मामले की जांच तत्कालीन घाटशिला डीएसपी अजीत कुजूर ने की थी।हालांकि, पवन कुमार ने उस समय आरोपों को साजिश बताते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया था।

निलंबन और विभागीय जांच का संगठन ने किया जिक्र

झारखंड आदिवासी युवा संगठन का कहना है कि उक्त मामले के बाद पवन कुमार को निलंबित किया गया था और विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी। संगठन ने सवाल उठाया है कि यदि जांच और विभागीय कार्रवाई की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है, तो उन्हें दोबारा थाना प्रभारी जैसी जिम्मेदारी क्यों दी गई।संगठन ने डीजीपी से मांग की है कि मामले में हुई जांच और विभागीय कार्रवाई की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए।

18 सितंबर को श्यामसुंदरपुर थाना प्रभारी बनाए गए

पूर्वी सिंहभूम में सितंबर 2026 में हुए पुलिस अधिकारियों के तबादले में पवन कुमार को श्यामसुंदरपुर थाना प्रभारी बनाया गया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने शनिवार को तत्कालीन थाना प्रभारी सुनील कुमार भोक्ता से प्रभार ग्रहण किया।प्रभार संभालने के बाद पवन कुमार ने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता देने की बात कही थी।

संगठन ने महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

संगठन का कहना है कि पुलिस विभाग में महिला कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना जरूरी है। विशेष रूप से आदिवासी महिला पुलिसकर्मी से जुड़े मामले में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की गई है।संगठन ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था के साथ-साथ अपने विभाग में जवाबदेही और विश्वास कायम रखने की भी है।

डीजीपी से पदस्थापना की समीक्षा की मांग

झारखंड आदिवासी युवा संगठन और आदिवासी छात्र संगठन ने डीजीपी से मांग की है कि पवन कुमार की श्यामसुंदरपुर थाना प्रभारी के रूप में पदस्थापना की समीक्षा की जाए। साथ ही पुराने मामले में हुई जांच, निलंबन और विभागीय कार्रवाई की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की गई है।संगठन का कहना है कि कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने से पुलिस विभाग की पारदर्शिता और जनता के विश्वास को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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