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Bihar: मुकेश सहनी का सीईसी ज्ञानेश कुमार पर विवादित बयान, बोले- एक खून माफ होता तो गोली मार देता

पटना: विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गुरुवार को विवादित बयान दिया। पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सहनी ने कहा कि अगर उन्हें एक हत्या की माफी होती तो वह सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह संविधान को मानने वाले व्यक्ति हैं और इसी वजह से ऐसा नहीं करेंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना है।

‘एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देता’

एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच चल रही बहस के बीच मुकेश सहनी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि संविधान उन्हें इसकी इजाजत देता और एक खून माफ होता, तो वह ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते। साथ ही उन्होंने खुद को संविधान में विश्वास रखने वाला बताया।सहनी के इस बयान को मीडिया रिपोर्टों ने विवादित टिप्पणी के तौर पर रिपोर्ट किया है।

चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

मुकेश सहनी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बीजेपी का आयोग बन चुका है और सीईसी ज्ञानेश कुमार संविधान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।सहनी ने कहा कि चुनाव किसी नेता के लिए नहीं, बल्कि जनता के लिए होता है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए तथा चुनाव पर होने वाले सरकारी खर्च का जिक्र करते हुए कहा कि अगर जनादेश को गलत तरीके से प्रभावित किया जा सकता है तो चुनाव कराने की जरूरत पर भी सवाल उठता है।

2029 में सरकार बदलने का दावा

सहनी ने 2029 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2029 में राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनेगी और ज्ञानेश कुमार जेल जाने वाले पहले व्यक्ति होंगे।उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में जो लोग भी शामिल हैं, उन्हें भी जेल जाना पड़ेगा। सहनी ने यह भी कहा कि यदि संबंधित लोग उस समय तक जीवित रहे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र करते हुए जेल जाने की संभावना संबंधी दावा किया। ये सहनी के राजनीतिक दावे हैं, न कि स्थापित तथ्य।

एसआईआर को लेकर चल रहा विवाद

मुकेश सहनी का बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। हालिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर SIR समेत कुछ मतदाता सूची संबंधी फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की ओर से पिछले करीब 10 महीनों में कई आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता नाम हटाने और बहाल करने से जुड़े मामलों तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल थे।

चुनाव आयोग ने रिपोर्टों पर क्या कहा?

इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि एसआईआर सहित आयोग के सभी आधिकारिक फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान सदस्यों की ओर से दिए गए नोट, तकनीकी सुझाव या टिप्पणियां आयोग के अंतिम फैसले से अलग कोई आधिकारिक निर्णय नहीं मानी जातीं।वहीं, रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि आपत्तियों के बावजूद तीनों चुनाव आयुक्तों ने विभिन्न मौकों पर संयुक्त रूप से चुनाव संबंधी ब्रीफिंग की थीं।

चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच एसआईआर पर बहस

एसआईआर को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया और फैसलों का बचाव कर रहा है। इसी राजनीतिक विवाद के बीच सहनी का ताजा बयान सामने आया है।

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