NewsUP INFACT

Uttar Pradesh: स्विट्जरलैंड से भारत लौटीं डॉ. रोहिणी घावरी सांसद चंद्रशेखर पर बरसी , चुनाव लड़ने के दिए संकेत

मेरठ: स्विट्जरलैंड में रहने के बाद भारत लौटीं डॉ. रोहिणी घावरी ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। 11 सितंबर को भारत लौटने के बाद रविवार को मेरठ पहुंचीं डॉ. रोहिणी ने एक सामाजिक सम्मेलन में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और समाज के अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने चंद्रशेखर आजाद के साथ चल रहे कानूनी विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी।डॉ. रोहिणी ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा मामला अदालत में विचाराधीन है और उन्हें अब न्यायालय की तारीख का इंतजार है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय का फैसला आने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

चंद्रशेखर आजाद पर डॉ. रोहिणी ने साधा निशाना

मीडिया से बातचीत के दौरान चंद्रशेखर आजाद को लेकर सवाल पूछे जाने पर डॉ. रोहिणी घावरी ने कहा कि उनके बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। उन्होंने चंद्रशेखर के खुद को अंबेडकरवादी बताने पर भी सवाल उठाया।डॉ. रोहिणी ने कहा कि जो व्यक्ति खुद को अंबेडकरवादी कहता है, उसे न्याय और महिलाओं के सम्मान की बात करनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर चंद्रशेखर आजाद अंबेडकरवादी हैं तो उनके साथ अन्याय क्यों हुआ।उन्होंने यह भी दावा किया कि चंद्रशेखर आजाद अब जेल जाएंगे और उन्हें कोई रोक नहीं सकता। हालांकि, यह उनका दावा है और मामले में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही किया जाएगा।

राजनीति में उतरने के संकेत, 2027 के चुनाव पर नजर

मेरठ के परतापुर बाईपास स्थित कदम्बा रिसॉर्ट में आयोजित सामाजिक सम्मेलन में डॉ. रोहिणी घावरी ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत दिए। उन्होंने समाज के अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी बात मजबूती से रखी।इससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि डॉ. रोहिणी घावरी आगामी विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरती हैं, तो इसका असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। खासकर नगीना और आसपास के क्षेत्रों में उनकी सक्रियता चंद्रशेखर आजाद के लिए चुनौती बन सकती है।

वाल्मीकि समाज के लिए 30 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग

सम्मेलन में आगामी विधानसभा चुनाव की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों में वाल्मीकि समाज को 30 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।डॉ. रोहिणी घावरी ने कहा कि राजनीतिक दलों ने लंबे समय से बहुजन समाज की उपेक्षा की है। अब समाज अपने अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की लड़ाई खुद लड़ने के लिए तैयार है।कार्यक्रम में आरक्षण वर्गीकरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। आयोजकों का कहना है कि आरक्षण व्यवस्था में वर्गीकरण से समाज के पिछड़े और उपेक्षित वर्गों को उनके हिस्से का लाभ मिल सकेगा।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

कार्यक्रम के समापन के बाद रोहित वाल्मीकि, डॉ. रोहिणी घावरी और समाज के अन्य लोगों ने विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित था।ज्ञापन एसपी सिटी विनायक भोसले और एसीएम चतुर्थ को सौंपा गया। इसमें समाज के अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा गया।

ज्ञापन सौंपने के दौरान हुई नोकझोंक

ज्ञापन सौंपने के दौरान डॉ. रोहिणी घावरी और एसपी सिटी के बीच कार्यक्रम के समय और समाज की मांगों को लेकर तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। इसके बाद एसपी सिटी ने अन्य व्यस्तताओं का हवाला देते हुए वहां से जाने की बात सामने आई।आयोजकों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर दिल्ली के जंतर-मंतर तक आंदोलन ले जाने की चेतावनी भी दी।

चंद्रशेखर आजाद से जुड़े मामले में अदालत के फैसले का इंतजार

डॉ. रोहिणी घावरी ने चंद्रशेखर आजाद से जुड़े आरोपों के सवाल पर स्पष्ट किया कि मामला अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में अंतिम फैसला न्यायालय को ही करना है।उन्होंने अपने बयानों के जरिए यह संकेत जरूर दिया कि वह आने वाले समय में सामाजिक और राजनीतिक तौर पर अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। यदि वह चुनावी राजनीति में उतरती हैं, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button