Delhi/Jharkhand: 45 साल पुराने डबल मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, 70 वर्षीय इकलौते जीवित दोषी की सजा निलंबित

नई दिल्ली : झारखंड के 45 साल पुराने डबल मर्डर केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश की न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने मामले की लंबी कानूनी प्रक्रिया को न्यायिक तंत्र की विफलता का उदाहरण बताया और 70 वर्षीय एकमात्र जीवित दोषी साइमन सोरेन की उम्र, खराब स्वास्थ्य और लंबे समय से चली आ रही कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए उनकी उम्रकैद की सजा निलंबित कर रिहाई का आदेश दिया।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि झारखंड हाई कोर्ट में इस मामले की अपील पर फैसला आने में दो दशक से अधिक समय क्यों लगा।

22 साल ट्रायल और 22 साल अपील में लगे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला न्यायिक देरी की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। आरोपियों को मुकदमे की प्रक्रिया पूरी होने में करीब 22 साल लगे और इसके बाद सजा के खिलाफ अपील पर फैसला आने में भी लगभग 22 साल का समय लग गया।अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि 1991 में आरोप तय होने के बाद ट्रायल पूरा होने में करीब 12 साल लग गए। डिस्ट्रिक्ट एवं सेशंस जज की रिपोर्ट के अनुसार, आरोप तय होने के बाद करीब 11 वर्षों के दौरान मामले को पांच अलग-अलग अदालतों में स्थानांतरित किया गया।

क्या है 1981 का डबल मर्डर केस?

यह मामला 18 अक्टूबर 1981 का है। दुमका जिले के भुरुंडिया गांव में विभूति मंडल, बनारसी मंडल और उनके परिवार के सदस्य धान की कटाई के लिए गए थे। इसी दौरान तीर-कमान और कुल्हाड़ी से लैस लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया।हमले में विभूति मंडल और बनारसी मंडल की हत्या कर दी गई। मामले में कुल छह लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें साइमन सोरेन भी शामिल थे।मामले की सुनवाई और अपील की प्रक्रिया इतनी लंबी चली कि आरोप तय होने से पहले ही दो आरोपियों की मौत हो गई। बाद में हाई कोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान तीन अन्य दोषियों की भी मौत हो गई।

70 साल के साइमन सोरेन ही बचे एकमात्र दोषी

वर्तमान में साइमन सोरेन इस मामले के एकमात्र जीवित दोषी हैं। उनकी उम्र करीब 70 वर्ष है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2002 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वर्ष 2024 में झारखंड हाई कोर्ट ने भी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, जिसके बाद साइमन सोरेन ने सरेंडर किया था। वर्तमान में वह हिरासत के दौरान अस्पताल में भर्ती हैं।

45 साल में सिर्फ 2 साल 4 महीने हिरासत में रहे

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पिछले करीब साढ़े चार दशकों के दौरान साइमन सोरेन ने कुल मिलाकर केवल 2 साल, 4 महीने और 12 दिन हिरासत में बिताए हैं।बचाव पक्ष की वकील फौजिया शकील की दलीलों पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि डबल मर्डर जैसे गंभीर अपराध के बावजूद आरोपी द्वारा पिछले 45 वर्षों में झेली गई पीड़ा और उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।अदालत ने उनकी सजा निलंबित करते हुए निजी मुचलके पर रिहाई का निर्देश दिया है। रिहाई की शर्तों में यह भी शामिल है कि वह कोई नया अपराध नहीं करेंगे।

हाई कोर्ट में लंबित आपराधिक अपीलों पर भी चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट में आपराधिक अपीलों के लंबित रहने की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से दाखिल हलफनामे में आपराधिक अपीलों के लंबित मामलों से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं।सुप्रीम कोर्ट ने अब निचली अदालत और हाई कोर्ट से इस मामले से संबंधित मूल रिकॉर्ड मांगा है। अदालत ने फिजिकल और डिजिटल दोनों रिकॉर्ड चार सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

केंद्र सरकार को बनाया पक्षकार

आपराधिक अपीलों के भारी बैकलॉग को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी मामले में पक्षकार बनाया है। अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी या सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को मामले से संबंधित रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

न्यायिक देरी पर बड़ा सवाल

45 साल पुराने इस मामले ने एक बार फिर न्याय मिलने में होने वाली देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट है कि अदालतें केवल अपराध की गंभीरता ही नहीं, बल्कि मुकदमे की लंबी अवधि, आरोपी की उम्र, स्वास्थ्य और न्यायिक प्रक्रिया में हुई देरी को भी गंभीरता से देख रही हैं।

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