Delhi: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन, पेपर लीक रोकने और परीक्षा प्रणाली में सुधार का दिया भरोसा

नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र के नाम संबोधन किया। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार के लिए व्यापक कदम उठा रही है, ताकि पेपर लीक और अनुचित साधनों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों के लिए सार्वजनिक परीक्षाएं अवसरों के द्वार खोलने का काम करती रहें।

‘पेपर लीक और गलत तरीकों पर पूरी तरह लगेगी रोक’

राष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं विद्यार्थियों के लिए अवसरों के द्वार खोलती हैं। इसलिए सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बड़े कदम उठा रही है।उन्होंने कहा कि सुधारों का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर पूरी तरह रोक लगाना और परीक्षा प्रणाली को युवाओं के लिए सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनाना है।राष्ट्रपति ने छात्रों को देश का भविष्य निर्माता बताते हुए कहा कि जिस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार और समाज का एकजुट रहना जरूरी है, उसी तरह विद्यार्थियों के वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी सभी के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को बताया निर्णायक

राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के फैसले को देशहित, विशेषकर किसानों के हित में निर्णायक कदम बताया।उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई को सशस्त्र बलों की क्षमता का प्रमाण बताते हुए कहा कि आतंकियों और उनके समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे कहीं भी छिपें, उन्हें अपने किए की सजा मिलेगी।राष्ट्रपति ने कहा कि सत्य और न्याय के पक्ष में मानवता विरोधी शक्तियों पर विजय प्राप्त करना भारत की परंपरा रही है और देश को इस पर गर्व है।

महिला आरक्षण के कार्यान्वयन पर जोर

परिसीमन को लेकर जारी राजनीतिक चर्चा के बीच राष्ट्रपति ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण के कार्यान्वयन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।उन्होंने कहा कि सैन्य, विज्ञान, खेल समेत विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2023 में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का प्रावधान करने वाला ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया जा चुका है। इसके लक्ष्य को प्राप्त करने से महिलाओं का नेतृत्व बढ़ेगा और लोकतंत्र अधिक समावेशी बनेगा।

जनप्रतिनिधियों से जन आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने का आह्वान

राष्ट्रपति ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को उनके संवैधानिक दायित्वों की याद दिलाई।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में जनता की आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें। कार्यपालिका को जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को जमीन पर लागू करना चाहिए।न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। उन्होंने विशेष रूप से वंचित वर्गों सहित हर नागरिक को समानता के आधार पर सम्मान के साथ समय पर न्याय मिलने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पर्यावरण संरक्षण को बताया भावी पीढ़ियों की जिम्मेदारी

राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण की महत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर आने वाली पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है जितना वर्तमान पीढ़ी का है।उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है कि भविष्य की पीढ़ियों को प्राकृतिक संपदाओं के उपयोग के अपने अधिकार में किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।

आर्थिक विकास पर जताया संतोष

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत की आर्थिक प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता का प्रभाव सभी देशों पर पड़ रहा है।इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आर्थिक अनुमानों के अनुसार भारत की विकास दर विश्व की औसत विकास दर की तुलना में दोगुने से अधिक रहने की उम्मीद है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई धारा का दावा

राष्ट्रपति ने देश को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में हुई प्रगति को भी बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब उत्साह का वातावरण है और विकास की सर्वस्पर्शी धारा आगे बढ़ रही है।राष्ट्रपति के संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा, युवाओं का भविष्य, महिला भागीदारी, न्याय, पर्यावरण और आर्थिक विकास जैसे प्रमुख मुद्दे केंद्र में रहे।

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