Bihar: चिराग पासवान का विपक्ष पर हमला, बोले- छात्रों की जरूरत के समय गायब रहे नेता, अब मार्च निकालना सिर्फ राजनीतिक लाभ

पटना। केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने विपक्षी नेताओं पर छात्रों के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकसभा हो या बिहार विधानसभा, विपक्ष के नेता अक्सर देर से जागते हैं। जब छात्रों को वास्तव में समर्थन की जरूरत थी, तब विपक्षी नेता राजनीति में व्यस्त थे। अब सरकार द्वारा छात्रों की मांगों पर काम किए जाने के बाद मार्च निकालना केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।
चिराग पासवान ने कहा कि आज के युवा और छात्र काफी समझदार हैं और वे अपने अधिकारों की लड़ाई खुद लड़ने में सक्षम हैं।

छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा

चिराग पासवान ने विपक्षी नेताओं के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब छात्रों का आंदोलन चल रहा था और उन्हें समर्थन की जरूरत थी, तब विपक्ष ने अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई।उन्होंने कहा कि अब जब सरकार ने छात्रों की मांगों को सुना है और उन पर काम शुरू किया है, ऐसे समय में मार्च निकालना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।उन्होंने कहा कि युवा और छात्र अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हैं और उन्हें किसी राजनीतिक दल के सहारे की आवश्यकता नहीं है।

बिहार की शराबबंदी पर चिराग पासवान ने उठाए सवाल

चिराग पासवान ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जब शराबबंदी कानून लागू किया गया था, उस समय विपक्ष में रहते हुए भी उनकी पार्टी ने इसका समर्थन किया था।हालांकि, उनका कहना है कि जिस उद्देश्य और सोच के साथ शराबबंदी लागू की गई थी, उसका प्रभाव पूरी तरह जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।

जहरीली शराब और दूसरे राज्यों से तस्करी पर चिंता

चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में आज भी जहरीली शराब बनने और पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी कर राज्य में पहुंचने की खबरें सामने आती रहती हैं।उन्होंने कहा कि केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है। शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए लोगों के बीच व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी है।

करीब 10 साल बाद शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग

चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू हुए करीब 10 साल हो चुके हैं। ऐसे में अब कानून की ईमानदारी से समीक्षा होनी चाहिए।सरकार को यह देखना चाहिए कि शराबबंदी लागू होने के बाद समाज में क्या बदलाव आया, कानून कहां प्रभावी रहा और किन क्षेत्रों में कमियां रह गई हैं।

‘समीक्षा का मतलब कानून खत्म करना नहीं’

चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि शराबबंदी कानून की समीक्षा करने का अर्थ इसे खत्म करना या कमजोर करना नहीं है। उनके मुताबिक समीक्षा का उद्देश्य कानून को और सख्त, प्रभावी और व्यावहारिक बनाना होना चाहिए।उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार को सभी सहयोगी दलों के साथ मिलकर चर्चा करनी चाहिए और जरूरत के अनुसार कानून में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए।

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