Bihar: बिहार में जिस ब्रांड की शराब जब्त होगी, बनाने वाली कंपनी पर भी केस

पटना: बिहार में शराबबंदी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सम्राट चौधरी सरकार ने अवैध शराब की बिक्री और तस्करी पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार ने फैसला लिया है कि राज्य में जिस ब्रांड की शराब जब्त होगी, उसका निर्माण करने वाली कंपनी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।इस संबंध में मद्य निषेध अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के मंत्री मदन सहनी ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल शराबबंदी कानून में किसी तरह का संशोधन नहीं किया जाएगा।

शराब जब्त होने पर कंपनी के खिलाफ भी होगी एफआईआर

मदन सहनी ने कहा कि बिहार में यदि किसी कंपनी की विदेशी शराब जब्त होती है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कंपनी के मालिक को भी मामले में आरोपी बनाया जा सकता है।मंत्री के मुताबिक इस व्यवस्था के तहत कार्रवाई शुरू भी हो चुकी है। हाल ही में पटना में शराब की एक खेप पकड़ी गई थी, जिसमें संबंधित कंपनी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई।

शराब तस्करों पर लगातार कार्रवाई: मंत्री

पटना स्थित जदयू कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मदन सहनी ने कहा कि शराब की तस्करी और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है।उन्होंने कहा कि कानून तोड़ने वाला कोई भी व्यक्ति हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य शराब की अवैध बिक्री और तस्करी पर प्रभावी तरीके से रोक लगाना है।

शराबबंदी कानून में बदलाव की जरूरत नहीं

बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री ने कहा कि फिलहाल इसमें किसी तरह के बदलाव की आवश्यकता नहीं है। विभाग समय-समय पर कानून और उसके क्रियान्वयन की समीक्षा करता है और पिछले महीने भी समीक्षा की गई थी।मदन सहनी ने कहा कि बिहार में करीब 10 वर्षों से शराबबंदी कानून लागू है। उनके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मंशा परिवारों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अति पिछड़े वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए शराबबंदी लागू करने की थी।

‘शराबबंदी से गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी’

मंत्री ने दावा किया कि शराबबंदी लागू होने के बाद कई गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले दिहाड़ी मजदूर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर देते थे और घर खाली हाथ लौटते थे।सरकार का दावा है कि शराबबंदी के बाद ऐसे परिवारों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है।

शराब और सूखे नशे के खिलाफ छापेमारी तेज

मदन सहनी ने दावा किया कि अवैध शराब की जब्ती में लगातार तेजी आई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल अधिक मात्रा में शराब जब्त किए जाने की बात उन्होंने कही।इसके साथ ही सूखे नशे के खिलाफ भी लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने अवैध शराब के नेटवर्क के साथ-साथ नशीले पदार्थों के कारोबार पर भी कार्रवाई तेज करने का संकेत दिया है।

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