Jharkhand: डीसी रेलखंड पर ट्रैक के पास जमीन धंसी, ट्रैकमैन की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

धनबाद-चंद्रपुरा (डीसी) रेलखंड पर बुधवार को एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई। सोनारडीह रेल केबिन के समीप रेल ट्रैक से महज चार मीटर की दूरी पर अचानक जमीन धंसने से गोफ (भूमिगत धंसान) बन गया। समय रहते ट्रैकमैन की सतर्कता से घटना की जानकारी रेलवे अधिकारियों तक पहुंची, जिससे संभावित बड़ा रेल हादसा टल गया।
ट्रैक निरीक्षण के दौरान सामने आई घटना
जानकारी के अनुसार, नियमित ट्रैक निरीक्षण के दौरान ड्यूटी पर तैनात ट्रैकमैन ने रेल लाइन के पास जमीन धंसी हुई देखी। खतरे की आशंका को देखते हुए उसने तत्काल अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही रेलवे और बीसीसीएल गोविंदपुर क्षेत्र के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
रेलवे और बीसीसीएल ने शुरू कराया भराई का कार्य
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने तत्काल गोफ की भराई का कार्य शुरू कराया, ताकि रेल ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और ट्रेनों के परिचालन पर किसी प्रकार का खतरा न रहे। फिलहाल एहतियात के तौर पर पूरे इलाके की लगातार निगरानी की जा रही है।
कोयला खनन और मिट्टी कटाव को माना जा रहा संभावित कारण
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि क्षेत्र में लंबे समय से हो रहे भूमिगत कोयला खनन और मिट्टी के कटाव के कारण जमीन धंसने की यह घटना हुई हो सकती है। हालांकि, वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।
पहले भी सुरक्षा कारणों से बंद हो चुका है डीसी रेलखंड
गौरतलब है कि धनबाद-चंद्रपुरा रेलखंड पहले भी सुरक्षा कारणों से चर्चा में रह चुका है। वर्ष 2017 में भूमिगत आग के खतरे को देखते हुए इस रेलमार्ग पर ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया था, जिससे 26 जोड़ी ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ था। करीब दो वर्षों तक चले आंदोलन और व्यापक सुरक्षा उपायों के बाद इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर दोबारा ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
सोनारडीह के पास ताजा धंसान की घटना ने एक बार फिर डीसी रेलखंड की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने रेलवे और संबंधित एजेंसियों से स्थायी समाधान निकालने तथा नियमित निगरानी बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।



