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Jharkhand: सेल चेयरमैन डॉ. ए.के. पांडा ने झारखंड-ओडिशा की खदानों का किया निरीक्षण, 2030-31 तक 35 मिलियन टन स्टील उत्पादन का लक्ष्य दोहराया

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. ए.के. पांडा ने कंपनी के ओडिशा ग्रुप ऑफ माइंस और झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस का दौरा कर खनन कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ संवाद करते हुए कैप्टिव खदानों के भविष्य के विकास और उत्पादन क्षमता का आकलन किया।

बरसुआ से मेघाहातुबुरू तक खदानों का लिया जायजा

अपने दौरे के दौरान डॉ. पांडा ने बरसुआ, तालडीह, कालता, बोलानी, गुआ, किरीबुरू और मेघाहातुबुरू लौह अयस्क खदानों का निरीक्षण किया। उन्होंने कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट कार्य निष्पादन की सराहना करते हुए कहा कि सभी खनन गतिविधियों में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक

किरीबुरू स्थित लर्निंग एंड डेवलपमेंट सेंटर में डॉ. पांडा ने झारखंड और ओडिशा ग्रुप ऑफ माइंस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सुरक्षा, उत्पादन वृद्धि, खदान विकास, परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल परिवर्तन और परिचालन उत्कृष्टता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

2030-31 तक 35 मिलियन टन क्रूड स्टील उत्पादन का लक्ष्य

बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. पांडा ने कहा कि सेल वर्ष 2030-31 तक 35 मिलियन टन क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता हासिल करने के लक्ष्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कंपनी अपनी कैप्टिव खदानों से प्रतिवर्ष 100 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन सुनिश्चित करेगी।उन्होंने कहा कि इससे इस्पात उत्पादन के लिए कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित होगी और घरेलू बाजार की बढ़ती मांग को भी प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।

डिजिटल तकनीक और एआई के उपयोग पर जोर

डॉ. पांडा ने कहा कि सेल के मुनाफे में वृद्धि के लिए दक्ष खनन संचालन, संसाधनों का बेहतर उपयोग और लौह अयस्क उत्पादन बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित आधुनिक डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि इससे उत्पादकता, सुरक्षा और सतत खनन प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सकेगा।

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मिलेगा बल

उन्होंने कहा कि सुरक्षित, प्रौद्योगिकी आधारित और सतत खनन प्रणाली का विकास सेल की प्राथमिकताओं में शामिल है। कंपनी अपनी विस्तार योजनाओं को गति देते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय विजन को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

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