Jharkhand: खरौंधी कस्तूरबा विद्यालय में दूसरे दिन भी 8 छात्राएं बीमार, डीसी ने एक को छोड़ सभी कर्मी सेवा मुक्त
झारखंड के गढ़वा जिले के खरौंधी प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में फूड प्वाइजनिंग और गर्म पानी पीने की घटना के दूसरे दिन भी आठ छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। इससे नाराज अभिभावकों ने विद्यालय पहुंचकर जमकर हंगामा किया। गुस्साए लोगों ने विद्यालय का ग्रिल तोड़कर परिसर में प्रवेश किया, जिससे कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
एक दिन पहले 100 से अधिक छात्राएं हुई थीं बीमार
शुक्रवार देर शाम विद्यालय में कथित रूप से दूषित भोजन और पानी की टंकी का अत्यधिक गर्म पानी पीने के बाद 100 से अधिक छात्राएं बीमार हो गई थीं। सभी छात्राओं को तत्काल भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद अधिकांश छात्राओं को उनके परिजनों के साथ घर भेज दिया गया था।शनिवार को फिर आठ छात्राओं के बीमार होने के बाद अभिभावकों का आक्रोश और बढ़ गया।
डीसी ने किया निरीक्षण, लापरवाही मिलने पर बड़ा फैसला
घटना की सूचना मिलते ही गढ़वा के उपायुक्त (डीसी) स्वयं खरौंधी स्थित विद्यालय पहुंचे और पूरे मामले की जांच की। निरीक्षण के दौरान विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही सामने आने पर उन्होंने सख्त कार्रवाई करते हुए एक कर्मचारी को छोड़कर विद्यालय के सभी कर्मियों को सेवा मुक्त करने का निर्देश दिया।इसके साथ ही अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पताल पहुंचकर छात्राओं का जाना हाल
विद्यालय निरीक्षण के बाद डीसी भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और भर्ती छात्राओं से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने बताया कि सभी बीमार छात्राओं का इलाज चल रहा है और फिलहाल सभी छात्राएं खतरे से बाहर हैं।डीसी ने कहा कि विद्यालय में मौजूद अन्य छात्राओं को भी विशेष निगरानी में रखा गया है।
‘दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा’
मीडिया से बातचीत में उपायुक्त ने कहा कि प्रारंभिक जांच में विद्यालय प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं
अभिभावकों के विरोध प्रदर्शन पर डीसी ने कहा कि बच्चों के बीमार होने से परिजनों का आक्रोश स्वाभाविक है, लेकिन किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



