NewsUP INFACT

Uttar Pradesh: लखनऊ अग्निकांड मामले में एलडीए ने जारी किए ध्वस्तीकरण के आदेश, एसआईटी जांच में सामने आईं कई बड़ी लापरवाहियां

लखनऊ: अलीगंज स्थित चार मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल मामले की जांच कर रहा है। इसी बीच लखनऊ विकास प्राधिकरण ने संबंधित भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) का आदेश जारी कर दिया है।एलडीए ने भवन स्वामी को निर्देश दिया है कि वह स्वयं अवैध निर्माण को ध्वस्त करें, अन्यथा प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई करते हुए इमारत को गिरा देगा।

आवासीय प्लॉट पर बना कमर्शियल कॉम्प्लेक्स

जांच में सामने आया है कि जिस प्लॉट पर यह इमारत बनाई गई, वह केवल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था। वर्ष 2014 में इस भूखंड का आवासीय नक्शा पास हुआ था, जबकि भवन का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।जानकारी के अनुसार, करीब 1,992 वर्गफुट के इस प्लॉट को वर्ष 2013 में खरीदा गया था। हालांकि, स्वीकृत आवासीय मानचित्र के विपरीत यहां कमर्शियल कॉम्प्लेक्स विकसित कर दिया गया।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी

प्राथमिक जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं जिसमे भवन में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था, जबकि व्यावसायिक भवनों में दो निकास मार्ग आवश्यक माने जाते हैं।प्रवेश मार्ग पर एसी की बाहरी यूनिटें लगी थीं, जिससे आपात स्थिति में निकासी प्रभावित हुई।वर्ष 2016 में इस भवन को अवैध घोषित किया गया था, लेकिन बाद में दस्तावेजों में इसे वैध दर्ज कर दिया गया।विद्युत वायरिंग और अन्य इलेक्ट्रिकल सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं।एनिमेशन सेंटर के निकास द्वार पर लगे बायोमेट्रिक सिस्टम के ऊपर वाले फ्लोर का गेट कथित रूप से बंद था, जिससे लोगों के बाहर निकलने में बाधा आई।भवन के सामने का हिस्सा भी काफी हद तक बंद था, जिससे बचाव कार्य प्रभावित हुआ।

फायर एनओसी नहीं ली गई

फायर विभाग के नियमों के अनुसार 15 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले भवनों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य होती है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संबंधित इमारत की ऊंचाई 15 मीटर से कम होने के कारण फायर एनओसी नहीं ली गई थी। हालांकि, अब जांच एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि भवन का वास्तविक उपयोग और सुरक्षा प्रबंध नियमों के अनुरूप थे या नहीं।

एसआईटी करेगी जिम्मेदारी तय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। जांच में भवन निर्माण, स्वीकृत मानचित्र, सुरक्षा मानकों के पालन और संबंधित विभागों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button