छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार दोपहर को उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब पूरा परिसर अचानक जयकारों और धार्मिक नारों से गूंज उठा। रेलवे स्टेशन रोड स्थित बेहद प्रसिद्ध ‘नारियल वाले हनुमान मंदिर’ को प्रशासन द्वारा मिले एक सरकारी नोटिस के विरोध में सैकड़ों श्रद्धालु, मंदिर समिति के सदस्य और विभिन्न धार्मिक संगठनों के लोग सड़कों पर उतर आए।गुस्सा इस कदर था कि महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भारी भीड़ ने सीधे कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर ही डेरा डाल दिया। देखते ही देखते सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट के सामने बैठकर एक स्वर में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ शुरू कर दिया। इस वजह से वहां का पूरा माहौल एक तरफ जहां भक्तिमय हो गया, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक महकमे में तनाव फैल गया।
क्या है पूरा विवाद और क्यों जारी हुआ नोटिस?
प्रशासन ने एक नोटिस जारी कर मंदिर परिसर में वर्षों से मन्नत के तौर पर चढ़ाए और बांधे जा रहे नारियलों को वहां से हटाने का निर्देश दिया है। जैसे ही यह खबर शहर में फैली, लोगों का गुस्सा भड़क गया।
आंदोलन और प्रदर्शन की मुख्य बातें
नोटिस की खबर मिलते ही शहर के व्यापारी, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। भारी प्रदर्शन के कारण कलेक्ट्रेट के सामने वाले मुख्य मार्ग पर घंटों चक्काजाम जैसी स्थिति बनी रही, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मंदिर समिति ने इस मामले में सीधे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस संवेदनशील मामले में दखल देने की मांग की है।
“दशकों पुरानी परंपरा से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं”
नारियल वाले हनुमान मंदिर की महिमा केवल छिंदवाड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और देश के कई हिस्सों में है। लोग यहां दूर-दूर से अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और मन्नत पूरी होने पर मंदिर परिसर में नारियल बांधते हैं।
“इस मंदिर की पहचान ही ‘नारियल वाले हनुमान जी’ के नाम से है। लोग इसे इसके सरकारी नाम से कम और इस खास परंपरा से ज्यादा पूजते हैं। ऐसे में नारियलों को वहां से हटाना मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को पूरी तरह से खत्म करने जैसा होगा। अगर सुरक्षा की कोई बात है, तो तकनीकी और व्यवस्थागत उपाय किए जाने चाहिए, सीधे प्रतिबंध लगाना कोई रास्ता नहीं है।”
— मंदिर समिति पदाधिकारी
प्रशासन का पक्ष: एडीएम ने दिया सुरक्षा और आगजनी का तर्क
बढ़ते बवाल और हंगामे को शांत करने के लिए एडीएम धीरेंद्र सिंह खुद प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और उन्होंने प्रशासन का पक्ष रखा। एडीएम धीरेंद्र सिंह ने दलील दी कि हाल के दिनों में कई जगहों पर आगजनी की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। मंदिर परिसर में भारी मात्रा में सूखे नारियल होने के कारण जनसुरक्षा के मद्देनजर यह एहतियाती कदम (नोटिस) उठाया गया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन का मकसद किसी की भी धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाना बिल्कुल नहीं है। प्रशासन ने कहा कि जल्द ही मंदिर समिति और प्रबुद्ध लोगों के साथ बैठकर बातचीत के जरिए इसका कोई सुरक्षित और व्यावहारिक बीच का रास्ता निकाल लिया जाएगा।फिलहाल, इस बड़े विवाद के बाद पूरे छिंदवाड़ा शहर में यह मामला सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।
