Delhi: प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंप दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सिफारिश पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। अब प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार भी संभालेंगे।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ फैसला

धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद यह चर्चा तेज थी कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी। सरकार ने फिलहाल यह अतिरिक्त दायित्व प्रह्लाद जोशी को सौंपने का निर्णय लिया है।

नीट विवाद के बीच खत्म हुआ छात्रों का आंदोलन

करीब 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हो गया। आंदोलनकारी नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।सीजेपी का दावा है कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, कथित आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों की समीक्षा सहित कई मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। इन दावों पर सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

इस्तीफा देते समय धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने इस्तीफे की जानकारी देते हुए कहा कि छात्र अपना समय पढ़ाई और करियर निर्माण में लगाएं, यही उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने लिखा कि वे चार दशकों से अधिक समय से शिक्षा और छात्रों के हित में कार्य करते रहे हैं तथा देश के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। साथ ही उन्होंने कुछ राजनीतिक दलों पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।

कौन हैं प्रह्लाद जोशी?

प्रह्लाद जोशी का जन्म 1962 में कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ। उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध केएस आर्ट्स कॉलेज, धारवाड़ से स्नातक की पढ़ाई की। वर्ष 2004 में पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए और इसके बाद लगातार पांच बार चुनाव जीते। 2019 में उन्हें पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और संसदीय कार्य मंत्री बनाया गया। वर्तमान में वे उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का भी दायित्व संभाल रहे हैं।

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