Bengal: राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने दिया इस्तीफा, पार्टी छोड़ने का भी ऐलान

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस में अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक विस्फोट हुआ है। राज्यसभा चुनाव से ठीक 10 दिन पहले टीएमसी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय तथा हाल ही में उच्च सदन भेजी गईं सांसद कोयल मलिक ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। दोनों नेताओं ने संसद की सदस्यता छोड़ने के साथ ही पार्टी से भी पूरी तरह नाता तोड़ लिया है। इस दोहरे इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या 13 से घटकर महज 11 रह गई है।

सुखेंदु शेखर और कोयल मलिक का बड़ा फैसला

पिछले कई दिनों से दोनों सांसदों के टीएमसी से अलग होने की अटकलें राजनीतिक गलियारों में तैर रही थीं। सुखेंदु शेखर रॉय ने कुछ समय पहले ही बयान दिया था कि टीएमसी के कई अन्य सांसद भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ सकते हैं, और अब उन्होंने खुद इस्तीफा देकर इस बात को सच साबित कर दिया है। कोयल मलिक का कार्यकाल अप्रैल 2032 तक और सुखेंदु शेखर रॉय का कार्यकाल अगस्त 2029 तक था। इतनी लंबी अवधि के कार्यकाल के बावजूद दोनों नेताओं का पार्टी छोड़ना टीएमसी के लिए बेहद आत्मघाती माना जा रहा है।

उपचुनाव में भाजपा को सीधा फायदा!

इन दोनों सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भारी फायदा मिलने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित फेरबदल के बाद बीजेपी के पास 200 से ज्यादा सीटें हैं, जबकि सत्तारूढ़ टीएमसी सिर्फ 80 सीटों पर सिमट चुकी है। इस संख्या बल के आधार पर बीजेपी आसानी से इन दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों को राज्यसभा भेज सकती है। इसके अलावा टीएमसी विधायकों के भीतर मची आंतरिक कलह के कारण बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग की भी आशंका जताई जा रही है।

सांसद काकोली घोष दस्तीदार का भी इस्तीफा, कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप

टीएमसी के भीतर मची रार यहीं नहीं थमी है। ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी नाराजगी जताते हुए पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है।काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर अपनी ही पार्टी के फायरब्रांड सांसद कल्याण बनर्जी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में शिकायत की गई है कि कल्याण बनर्जी ने उनके साथ दुर्व्यवहार और गाली-गलौज की है।

57 विधायकों की बगावत, ऋतब्रत बनर्जी बने ‘विपक्ष के नेता’

संगठन और संसद के साथ-साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी टीएमसी पूरी तरह बिखरती नजर आ रही है। पार्टी के 57 विधायकों ने पहले ही खुली बगावत कर दी है और सदन में अपना अलग गुट बनाकर ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता नामित किया था, जिसे बागी गुट ने खारिज कर दिया। इसके बाद ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई विधायकों की आधिकारिक बैठक से भी अधिकांश विधायकों ने दूरी बना ली, जो यह साफ दर्शाता है कि बंगाल की सत्ता में बहुत बड़ा उलटफेर होने वाला है।

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