मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा की गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व नेता अनूप राघव ने ‘चींटी जनता पार्टी’ नाम से नए राजनीतिक संगठन की शुरुआत की है। उन्होंने दावा किया है कि यह पार्टी आम जनता, कमजोर वर्गों और जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का काम करेगी।
क्यों रखा गया ‘चींटी जनता पार्टी’ नाम?
पार्टी के संस्थापक अनूप राघव ने बताया कि चींटी मेहनत, अनुशासन, एकजुटता और निरंतर संघर्ष का प्रतीक मानी जाती है। इसी विचारधारा से प्रेरित होकर पार्टी का नाम ‘चींटी जनता पार्टी’ रखा गया है। उनका कहना है कि समाज के वंचित, कमजोर और आम लोगों की आवाज को एक मजबूत राजनीतिक मंच देने के उद्देश्य से इस दल का गठन किया गया है।
जनता से सीधे संवाद पर रहेगा फोकस
अनूप राघव ने कहा कि उनकी पार्टी स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने पर विशेष जोर देगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में कई जनसमस्याएं अभी भी समाधान की प्रतीक्षा कर रही हैं और उनकी पार्टी ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाएगी।
तीन दशक तक भाजपा में रहे सक्रिय
अनूप राघव करीब 30 वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं। इस दौरान उन्होंने संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर रहते हुए वे भ्रष्टाचार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से नहीं उठा पा रहे थे, जिसके चलते उन्होंने अलग राजनीतिक दल बनाने का फैसला किया।
2027 यूपी विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी
चींटी जनता पार्टी ने वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी भागीदारी का संकेत दिया है। अनूप राघव का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन की भी तैयारी
राघव ने बताया कि आने वाले समय में पार्टी की ओर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन भी आयोजित किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कार्यक्रम में देश-विरोधी तत्वों या तथाकथित “डफली गैंग” को शामिल नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
मेरठ से नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चींटी जनता पार्टी आगामी चुनावों में कितना प्रभाव छोड़ पाती है और जनता के बीच अपनी पकड़ बनाने में कितनी सफल होती है।
