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Jharkhand: सूरदा माइंस के 950 मजदूरों का फूटा गुस्सा, संवेदक कंपनी पर श्रमिक अधिकारों के हनन का आरोप

घाटशिला। पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला स्थित हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की सूरदा माइंस में कार्यरत संवेदक (ठेकेदार) कंपनी के खिलाफ मजदूरों का आक्रोश चरम पर है। माइंस में काम करने वाले सैकड़ों श्रमिकों ने संवेदक कंपनी पर श्रम कानूनों के उल्लंघन और उनके बुनियादी अधिकारों की अनदेखी करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। मजदूरों की इस बढ़ती नाराजगी को देखते हुए अब आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

950 मजदूर बुनियादी सुविधाओं से वंचित

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सूरदा माइंस में वर्तमान में खनन कार्य का जिम्मा संभाल रही संवेदक कंपनी आर.के. इंटरप्राइजेज रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड के अधीन करीब 950 मजदूर कार्यरत हैं। इन मजदूरों का आरोप है कि उन्हें श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली बुनियादी और अनिवार्य सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं। सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी का सही ढंग से भुगतान न होना। खदान जैसी जोखिम भरी जगह पर काम करने के बावजूद बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का अभाव। कार्यस्थल पर दुर्घटना होने की स्थिति में उचित दुर्घटना मुआवजा न मिलना।

बैठक में सर्वसम्मति से बागराई मार्डी चुने गए नेतृत्वकर्ता

अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर सूरदा माइंस के मजदूरों ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में क्षेत्र के जाने-माने मजदूर नेता और आंदोलनकारी बागराई मार्डी मुख्य रूप से शामिल हुए। बैठक में सभी मजदूरों ने अपनी-अपनी समस्याओं को विस्तार से उनके समक्ष रखा। इसके बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर बागराई मार्डी को इस पूरे आंदोलन का आधिकारिक नेतृत्वकर्ता चुना गया।

प्रबंधन को चेतावनी: मांगें पूरी न हुईं, तो ठप होगा काम

मजदूरों को संबोधित करते हुए नव-निर्वाचित आंदोलन प्रमुख बागराई मार्डी ने कहा कि श्रमिकों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि “मजदूरों की जायज मांगों को लेकर बहुत जल्द संवेदक और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के उच्च प्रबंधन से विधिवत वार्ता की जाएगी। लेकिन, यदि कंपनी प्रबंधन ने समय रहते सकारात्मक रुख नहीं अपनाया और मांगों का समाधान नहीं किया, तो आने वाले दिनों में सूरदा माइंस में काम ठप कर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।”

मजदूरों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ऐसे में यदि जल्द ही वार्ता के जरिए समाधान नहीं निकला, तो इस आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा।

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