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Bihar: मधुबनी में एक साथ 118 पंचायत सचिवों पर गिरी गाज, डीएम बोले ‘जनता के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’

मधुबनी: बिहार में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर अड़े पंचायत सचिवों के खिलाफ सरकार ने अब ‘सख्त एक्शन’ मोड अपना लिया है। इसी कड़ी में मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने अनुशासनहीनता और कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में 118 पंचायत सचिवों को एक साथ निलंबित कर दिया है।

क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

डीएम ने यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत की है। निलंबन के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित बताए गए हैं जिसमे विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों पर ध्यान न देना, आगामी जनगणना की तैयारियों में सहयोग न करना, लंबे समय से बिना सूचना के कार्यस्थल से गायब रहना और विभाग द्वारा बिना शर्त हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने के अल्टीमेटम को नजरअंदाज करना।

‘प्रशासन की रीढ़ हैं पंचायत सचिव’

कार्रवाई की पुष्टि करते हुए डीएम आनंद शर्मा ने कहा कि पंचायत सचिव ग्रामीण प्रशासन के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने इनके महत्व को रेखांकित करते हुए कहा “मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सामाजिक सुरक्षा और राजस्व से जुड़ी सभी जनकल्याणकारी योजनाएं इन्हीं के माध्यम से जनता तक पहुँचती हैं। ऐसे में इनका काम बंद करना सीधे तौर पर आम जनता के अधिकारों पर चोट करना है।”

चेतावनी के बाद भी नहीं लौटे काम पर

प्रशासन के अनुसार, इन पंचायत सचिवों को पूर्व में कई बार पत्राचार और नोटिस के माध्यम से 7 दिनों के भीतर काम पर लौटने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद, आदेशों की अवहेलना की गई। अंततः पंचायती राज विभाग, बिहार के निर्देशों और जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर यह सामूहिक निलंबन किया गया है।

8 अप्रैल से जारी है राज्यव्यापी हड़ताल

गौरतलब है कि बिहार के पंचायत सचिव अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बीते 8 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। मधुबनी की इस कार्रवाई के बाद अब अन्य जिलों में भी हड़ताली कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया है।

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