रांची/दिल्ली : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार दोपहर एक विशेष विमान से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। आधिकारिक तौर पर यह दौरा झारखंड की जनजातीय अस्मिता और ‘सरना धर्म कोड’ की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे 4 मई को आने वाले पांच राज्यों के चुनावी नतीजों से जोड़कर देख रहे हैं।
सरना धर्म कोड: राष्ट्रपति से गुहार
रवानगी से पहले मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि उनकी दिल्ली यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य जनगणना में सरना धर्म कोड को जगह दिलाना है। झारखंड विधानसभा से सर्वसम्मति से पारित होने के बाद भी यह प्रस्ताव केंद्र के पास अटका हुआ है।सोरेन महामहिम राष्ट्रपति से मुलाकात कर राज्य की जनभावनाओं और आदिवासियों के धार्मिक पहचान के संकट से उन्हें अवगत कराएंगे।
चुनावी नतीजों के बीच ‘शक्ति प्रदर्शन’
मुख्यमंत्री का दिल्ली प्रवास ऐसे समय में हो रहा है जब 4 मई को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होने वाले हैं। नतीजों के तुरंत बाद हेमंत सोरेन की दिल्ली में मौजूदगी कई विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं के साथ बैठकों का संकेत दे रही है। झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन को मजबूती देने के बाद सोरेन अब राष्ट्रीय राजनीति में ‘किंगमेकर’ या एक मजबूत क्षेत्रीय चेहरे के रूप में उभरने की कोशिश में हैं।
एक तीर से दो निशाने
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सोरेन ने इस दौरे का समय बहुत सोच-समझकर चुना है। सरना कोड के जरिए वे अपने आदिवासी वोट बैंक को यह संदेश दे रहे हैं कि उनके अधिकारों की लड़ाई के लिए वे दिल्ली की चौखट तक जाने को तैयार हैं। दिल्ली में रहकर वे चुनावी नतीजों के बाद बनने वाले नए राजनीतिक समीकरणों पर सीधी नजर रख सकेंगे और भविष्य की रणनीति तय कर पाएंगे।
5 मई को होगी वापसी
मुख्यमंत्री 5 मई को रांची लौटेंगे। उनके लौटने तक दिल्ली में होने वाली उनकी उच्चस्तरीय मुलाकातों और चुनावी परिणामों के बाद झारखंड की राजनीति में भी नए मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है।
