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Bihar: बिहार से महाराष्ट्र भेजी जा रही 163 मासूमों की बड़ी खेप कटनी में पकड़ी गई, 8 तस्कर गिरफ्तार

कटनी/अररिया : बिहार के अररिया और आसपास के जिलों से महाराष्ट्र ले जाए जा रहे 163 नाबालिग बच्चों को मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए मुक्त कराया गया है। आरपीएफ और जीआरपी ने पटना-पूर्णा एक्सप्रेस में सघन छापेमारी कर इस कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में बिहार के रहने वाले 8 कथित तस्करों को गिरफ्तार किया है।

रात भर चला ‘ऑपरेशन रेस्क्यू’

आरपीएफ निरीक्षक वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में यह अभियान शनिवार की पूरी रात चला। पुलिस को सूचना मिली थी कि बच्चों के एक बड़े समूह को बिना किसी वैध दस्तावेज और टिकट के ले जाया जा रहा है। पकड़े गए बच्चों की उम्र 6 से 13 वर्ष के बीच है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों को कोच में क्षमता से अधिक भरकर भेड़-बकरियों की तरह ले जाया जा रहा था।शुरुआती जांच के मुताबिक, इन बच्चों को अररिया से इकट्ठा कर महाराष्ट्र के लातूर ले जाया जा रहा था, जहाँ उनसे बंधुआ मजदूरी करवाने की आशंका जताई गई है।

8 आरोपी गिरफ्तार, कड़ी धाराओं में केस दर्ज

जीआरपी ने इस मामले में बिहार के विभिन्न जिलों के 8 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 (नाबालिगों की तस्करी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस धारा के तहत दोषियों को कम से कम 10 वर्ष की कठोर सजा हो सकती है। पुलिस अब इस सिंडिकेट के अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच कर रही है।

परिजनों का पलटवार: “पढ़ाई के लिए जा रहे थे बच्चे”

वहीं दूसरी ओर, इस मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। अररिया के जोकीहाट क्षेत्र से बच्चों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिसिया कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई है।अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को तस्करी के लिए नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के मदरसों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा जा रहा था। परिजनों ने मानव तस्करी (ट्रैफिकिंग) के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है और मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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