Uttar Pradesh: लखनऊ से 4 आतंकी गिरफ्तार, पाकिस्तान हैंडलर्स के इशारे पर रच रहे थे ‘लोन वुल्फ’ हमले की साजिश

लखनऊ : उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते ने राजधानी लखनऊ में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे और देश के महत्वपूर्ण संस्थानों, रेलवे सिग्नल बॉक्स और राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे।

मेरठ और नोएडा के रहने वाले हैं आरोपी; ‘डेविल’ है मास्टरमाइंड

एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए चारों युवक उत्तर प्रदेश के ही निवासी हैं। गिरोह का मुख्य सरगना 25 वर्षीय साकिब उर्फ डेविल है, जो पेशे से नाई है और इसी काम की आड़ में देश विरोधी नेटवर्क चला रहा था।गिरफ्तार आरोपियों में साकिब उर्फ डेविल (25): निवासी मेरठ (मुख्य सदस्य),अरबाब (20): निवासी मेरठ,विकास गहलावत (27): निवासी नोएडा और लोकेश (19): निवासी नोएडा शामिल है।

टेलीग्राम और सिग्नल के जरिए ‘सीमा पार’ से निर्देश

एटीएस की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह गिरोह टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर पाकिस्तानी हैंडलर्स और अफगानिस्तान के संदिग्ध नंबरों से जुड़ा था। इनका मुख्य उद्देश्य रेलवे सिग्नल बॉक्स को नष्ट करना, गैस सिलेंडर लदे ट्रकों में आग लगाना और वीआईपी राजनेताओं की रेकी करना था।
पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा इन्हें महत्वपूर्ण संस्थानों की गूगल लोकेशन भेजी जाती थी, जिसके आधार पर ये गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में रेकी करते थे।

वीडियो भेजकर QR कोड से मंगवाते थे ‘फंडिंग’

पूछताछ में पता चला है कि ये आतंकी पूरी तरह पैसों के लालच में इस नेटवर्क से जुड़े थे।गिरोह ने पिछले दिनों कुछ जगहों पर आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया था। वारदात के बाद ये उसका वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजते थे।वीडियो मिलने के बाद पाकिस्तानी आका इन्हें QR कोड के माध्यम से पैसे भेजते थे। साकिब ने पैसों का लालच देकर ही नोएडा के विकास और लोकेश को अपने साथ जोड़ा था।

बरामदगी और कानूनी कार्रवाई

गिरफ्तारी के दौरान एटीएस ने इनके पास से कई आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की हैं जिसमे 7 स्मार्टफोन और 24 पम्पलेट (कट्टरपंथी सामग्री),एक कैन ज्वलनशील पदार्थ (आगजनी के लिए) और आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए है।यूपी एटीएस अब इन चारों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और क्या इन्होंने किसी बड़े हमले की तारीख तय कर रखी थी। इस कार्रवाई से प्रदेश में एक बड़े संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया गया है।

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