दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायलय ने 22 मई को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया को कड़ी फटकार लगाते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि पहलवान विनेश फोगट का मूल्यांकन करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम बनाई जाए। इसके बाद यह फैसला लिया जाए कि उन्हें आगामी एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने दिया जाए या नहीं।न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायाधीश तुषार राव गेडेला ककी बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि खिलाड़ियों के हित सर्वोपरि होने चाहिए और बड़े खिलाड़ियों को मौका न देना कई सवाल खड़े करता है।
कोर्ट ने मातृत्व को लेकर भी की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि भारत में मातृत्व का सम्मान किया जाता है और सरकार या खेल संघों को किसी खिलाड़ी के खिलाफ बदले की भावना से काम नहीं करना चाहिए।अदालत ने मौखिक रूप से केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि विशेषज्ञों का पैनल बनाकर विनेश फोगाट की फिटनेस और क्षमता का आकलन किया जाए ताकि वह प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकें।
रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने लगाया था अनुशासनहीनता का आरोप
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने विनेश फोगाट पर अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए जून तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर रोक लगा दी थी।संघ का कहना है कि किसी खिलाड़ी को संन्यास से वापसी करने से पहले छह महीने पूर्व सूचना देनी होती है, लेकिन विनेश ने ऐसा नहीं किया। इसी आधार पर उन पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया।
एशियन गेम्स ट्रायल में भागीदारी पर विवाद
विनेश फोगाट ने इस प्रतिबंध के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने उन्हें 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल में तुरंत शामिल करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया पहले ही उन पर प्रतिबंध लगा चुका था।हालांकि अब कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में निष्पक्ष तरीके से फैसला लेने और खिलाड़ी के हित को प्राथमिकता देने को कहा है।
