पटना : बिहार में जहरीली शराब के कारण लगातार हो रही मौतों ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी ही सरकार के कार्यकाल में कानून व्यवस्था और शराबबंदी के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय केवल कानून बनाने का नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपे आपराधिक सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने का है।
“मंशा अच्छी, पर धरातल पर चुनौती”: चिराग पासवान
चिराग पासवान ने शराबबंदी कानून का समर्थन करते हुए इसके कार्यान्वयन में आ रही खामियों को उजागर किया।राज्य के विभिन्न जिलों से आ रही जहरीली शराब से मौत की खबरें विचलित करने वाली हैं।चिराग ने कहा कि शराबबंदी की मंशा भले ही सामाजिक सुधार की रही हो, लेकिन इसके पीछे सक्रिय आपराधिक और असामाजिक तत्व इस पूरी व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।
सरकार की सफलता गिनाने का नहीं, कार्रवाई का समय
चिराग पासवान ने प्रशासन को नसीहत देते हुए कहा कि मौतों के आंकड़ों के बीच अपनी पीठ थपथपाना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन घटनाओं का सिलसिला थम क्यों नहीं रहा? अब वक्त आ गया है कि सरकार इस पर कोई ठोस और प्रभावी रणनीति तैयार करे। केंद्रीय मंत्री ने मांग की है कि शराब के अवैध कारोबार में शामिल ‘बड़े चेहरों’ की पहचान की जाए और उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई हो जो नजीर बन सके।
भविष्य की रणनीति पर जोर
चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार शराबबंदी को ‘विफल’ बताकर सरकार को घेर रहा है।उन्होंने कहा कि यह पता लगाना अनिवार्य है कि प्रशासन की नाक के नीचे जहरीली शराब कैसे बनाई और बेची जा रही है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि नेटवर्क चलाने वाले मास्टरमाइंड्स पर प्रहार करना होगा।
बिहार में शराबबंदी के बीच जहरीली शराब से होने वाली मौतों ने एक बार फिर इस कानून के कड़ाई से पालन और पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
