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Jharkhand: एनआईटी जमशेदपुर में प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन

जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर के ‘भारतीय ज्ञान केंद्र’ एवं ‘भारतीय पारंपरिक ज्ञान विज्ञान समाज’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15वीं दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मंगलवार को भव्य समापन हुआ। “प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी” विषय पर आधारित इस संगोष्ठी ने भारतीय विरासत और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच एक सेतु का कार्य किया।

भारतीय ज्ञान प्रणाली और एआई का एकीकरण

समापन सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने प्राचीन ज्ञान को भविष्य की तकनीक से जोड़ने पर ज़ोर दिया। डॉ. सोहनी बनर्जी ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों के साथ एकीकृत करने की संभावनाओं पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. प्रेमलता देवी ने स्पष्ट किया कि प्राचीन भारतीय विज्ञान केवल परंपरा नहीं, बल्कि पूर्णतः तार्किक और समकालीन संदर्भों में भी वैज्ञानिक है। श्री के. ई. एन. राघवन ने गो-आधारित परंपराओं की पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्ता को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से रेखांकित किया।

ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान का समन्वय

समापन समारोह में शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र के दिग्गजों ने अपने विचार साझा किए जिसमें डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान की अवधारणाओं के समन्वय को मानव जाति के समग्र विकास के लिए अनिवार्य बताया। एनआईटीटीटीआर कोलकाता के पूर्व निदेशक प्रो. देवी प्रसाद मिश्रा ने “शिक्षक बनो अभियान” के माध्यम से ज्ञान के प्रसार पर बल दिया। प्रो. राकेश सहगल ने शिक्षा में संस्कृत भाषा के समावेशन की आवश्यकता बताई, वहीं मुख्य अतिथि डॉ. नरेंद्र कुमार ने ज्योतिष शास्त्र के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।

एनआईटी जमशेदपुर की प्रतिबद्धता

संस्थान के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने इस पहल को आधुनिक शिक्षा नीति के अनुरूप बताते हुए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से छात्रों में स्वदेशी तकनीक के प्रति गौरव का भाव जागृत होता है।

गरिमामयी उपस्थिति

समारोह में संस्थान की प्रथम महिला श्रीमती इंद्राणी सूत्रधार, उप-निदेशक प्रो. राम विनय शर्मा, प्रो. प्रभा चंद, प्रो. ए. के. एल. श्रीवास्तव समेत भारी संख्या में संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मनीष कुमार झा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जितेंद्र कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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