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Jharkhand: जमशेदपुर में ग्रामीण स्टार्टअप को बढ़ावा, नाबार्ड चेयरमैन ने एक्स एलआरआई में आरबीआईसी का किया उद्घाटन

जमशेदपुर: ग्रामीण उद्यमिता और कृषि आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट के चेयरमैन डॉ. शाजी के. वी. ने शनिवार को जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट परिसर में ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। यह केंद्र एक्सएलआरआई काउंसिल फॉर इनोवेशन टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल फॉर के तहत स्थापित किया गया है, जिसे नाबार्ड की ग्राम्य विकास योजनाओं के अंतर्गत विकसित किया गया है।इस अवसर पर टी. वी. नरेंद्रन, जो एक्सएलआरआई के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन हैं, तथा फादर सेबेस्टियन जॉर्ज सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

12 राज्यों के स्टार्टअप्स को मिलेगा लाभ

नया स्थापित यह इनक्यूबेशन सेंटर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के 12 राज्यों—बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, सिक्किम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश—में कृषि, ग्रामीण नवाचार और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा।एक्ससीआईटीइ “सोशल इंपैक्ट फर्स्ट, प्रॉफिट सेकेंड” की अवधारणा पर काम करेगा। इसके तहत खास तौर पर आदिवासी आजीविका, महिला-नेतृत्व वाले उद्यम और सतत विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्टार्टअप्स को मिलेगा मेंटरशिप और फंडिंग सपोर्ट

यह केंद्र स्टार्टअप्स को मेंटोरशिप, फंडिंग, ग्रांट्स और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराएगा। साथ ही यह युवा उद्यमियों को ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने और कृषि आधारित उद्यमिता को मजबूत बनाने में मदद करेगा।एक्ससीआईटीइ को पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक नोडल केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे न केवल जमशेदपुर बल्कि पूरे झारखंड को स्टार्टअप हब के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

एक्सएलआरआई का 76 वर्षों का गौरवशाली सफर

उल्लेखनीय है कि एक्सएलआरआई की स्थापना वर्ष 1949 में हुई थी और यह देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में से एक है। पिछले 76 वर्षों में संस्थान ने उद्यमिता और सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।एक्सएलआरआई के पूर्व छात्रों द्वारा अब तक चार यूनिकॉर्न कंपनियों की स्थापना की जा चुकी है।

ग्रामीण नवाचार को मिलेगी नई दिशा

इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि सामाजिक प्रभाव और लाभप्रदता के बीच संतुलन बनाते हुए ग्रामीण भारत में नवाचार, कृषि आधारित उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को नई दिशा मिलेगी।

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