NewsUP INFACT

Uttar Pradesh: अयोध्या में रामलला का ‘दिव्य सूर्य तिलक’, जन्म के शुभ मुहूर्त पर छंटे बादल और खिली धूप

अयोध्या : मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में आज रामनवमी के अवसर पर एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। दोपहर के ठीक 12 बजे, जैसे ही रामलला के प्राकट्य का शुभ मुहूर्त आया, प्रकृति ने भी मानो प्रभु का स्वागत किया। सुबह से छाए काले बादलों और हल्की बूंदाबांदी के बीच अचानक आसमान साफ हो गया और सूर्य की सुनहरी किरणों ने रामलला के ललाट पर ‘दिव्य अभिषेक’ कर दिया।

मौसम का ‘चमत्कार’: सूर्य देव ने किया तिलक

अयोध्या में सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ था। हल्की बारिश और बादलों के कारण लग रहा था कि शायद इस बार सूर्य तिलक का सीधा दृश्य प्रभावित होगा। लेकिन जैसे ही मंदिर में जन्मोत्सव का समय करीब आया, बादलों की ओट से सूरज निकल आया।सूर्य की किरणों ने सीधे रामलला के मस्तक को छुआ, जिसे देखकर वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। भक्तों ने इसे साक्षात ‘प्रभु की उपस्थिति’ का संकेत माना।

“भय प्रकट कृपाला दीनदयाला” से गूँजी रामनगरी

राम जन्मभूमि परिसर, कनक भवन और हनुमानगढ़ी समेत पूरी अयोध्या ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गुंजायमान रही। कनक भवन में श्रद्धालुओं ने नाच-गाने और सोहर गाकर खुशियां मनाईं।हनुमानगढ़ी में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। ‘भय प्रकट कृपाला’ की गूंज ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। हर गली और हर मोड़ पर श्रद्धालु भजन-कीर्तन और नृत्य करते हुए उत्सव में सराबोर दिखे।

आस्था, उत्साह और भक्ति का संगम

अयोध्या के इस ऐतिहासिक रामनवमी उत्सव ने सुरक्षा और श्रद्धा के बीच एक बेहतरीन समन्वय पेश किया। भारी भीड़ को देखते हुए सरयू घाट से लेकर राम पथ तक कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। लोगों का कहना था कि राम मंदिर निर्माण के बाद की यह रामनवमी सदियों तक याद रखी जाएगी।प्रभु राम के जन्म के साथ ही अयोध्या का वातावरण ऐसा लग रहा था मानो त्रेता युग जीवंत हो उठा हो। आस्था और विज्ञान (सूर्य तिलक तकनीक) के इस मेल ने पूरी दुनिया का ध्यान एक बार फिर अयोध्या की ओर खींच लिया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button