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Maharashtra: वंदे मातरम् विवाद पर वारिस पठान का विवादित बयान- ‘फांसी दे दो, फिर भी नहीं गाऊंगा’, जानिए पूरा मामला

मुंबई: वंदे मातरम् को लेकर जारी विवाद के बीच एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह वंदे मातरम् नहीं गाएंगे, भले ही उन्हें इसके लिए फांसी पर क्यों न चढ़ा दिया जाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रगीत का सम्मान करते हैं, लेकिन इसे किसी पर जबरन थोपा नहीं जा सकता।

‘वंदे मातरम् का सम्मान करते हैं, लेकिन जबरदस्ती नहीं’

वारिस पठान ने कहा कि वह वंदे मातरम् का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति को इसे गाने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह दबाव में आकर वंदे मातरम् नहीं गाएंगे।उनके इस बयान के बाद वंदे मातरम् को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

छात्रों के आंदोलन पर भी वारिस पठान ने दिया बयान

एआईएमआईएम नेता ने छात्रों के आंदोलन को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जेन -जी और छात्रों के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।वारिस पठान ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार को झुकना पड़ा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी छात्रों के साथ है, लेकिन छात्रों के मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

मराठी भाषा को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर निशाना

वारिस पठान ने महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर जारी बहस पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा सीखना अच्छी बात है और सभी को इसे सीखना चाहिए, लेकिन डराकर, धमकाकर या नोटिस जारी करके किसी को भाषा सीखने के लिए मजबूर करना सही नहीं है।उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि मराठी को अनिवार्य करने की बात है तो बॉलीवुड सितारों और बड़े उद्योगपतियों के लिए भी इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए।

ईद-ए-मिलाद पर शराबबंदी की मांग

वारिस पठान ने 26 अगस्त को ईद-ए-मिलाद के अवसर पर महाराष्ट्र में एक दिन के लिए शराब की दुकानें बंद रखने की मांग भी की।उन्होंने तर्क दिया कि यदि अलग-अलग धार्मिक त्योहारों पर शराब और मांस की बिक्री को लेकर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो ईद-ए-मिलाद के दिन भी शराबबंदी होनी चाहिए।

कांग्रेस मुख्यालय से शुरू हुआ वंदे मातरम् विवाद

वंदे मातरम् को लेकर ताजा राजनीतिक विवाद कांग्रेस मुख्यालय में कथित तौर पर राष्ट्रगीत को पूरा नहीं गाए जाने के बाद शुरू हुआ। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई।वंदे मातरम् को लेकर संसद और स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में भी चर्चा हुई है। इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

जीतन राम मांझी ने भी दिया था कड़ा बयान

विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए विरोध करने वालों पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ लोग राष्ट्रगीत के भी ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात कर रहे हैं और चेतावनी दी थी कि यदि वे नहीं सुधरे तो जनता इसका जवाब देगी।वंदे मातरम् को लेकर नेताओं के लगातार सामने आ रहे बयानों के बीच यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बनता जा रहा है।

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