चक्रधरपुर। ट्रेन दुर्घटना जैसी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने, राहत एवं बचाव कार्यों की तत्परता परखने तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से चक्रधरपुर रेल मंडल की ओर से बृहस्पतिवार की मध्यरात्रि बण्डामुण्डा के सीएफ यार्ड में व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसमें पैसेंजर ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने का कृत्रिम परिदृश्य तैयार कर रेलकर्मियों एवं बचाव दलों ने राहत-बचाव कार्यों का जीवंत अभ्यास किया।मॉक ड्रिल के दौरान रात 2 बजकर 3 मिनट पर चक्रधरपुर स्टेशन में अचानक पांच हुटर बजाए गए। हुटर की आवाज सुनते ही मंडल के अधिकारी एवं संबंधित विभाग सतर्क हो गए। इसके बाद उद्घोषणा की गई कि बण्डामुण्डा सीएफ यार्ड में पैसेंजर ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। दुर्घटना के परिदृश्य में ए-वन और बी-वन वातानुकूलित कोच तथा एस-वन स्लीपर कोच के आपस में टकराने की स्थिति दर्शाई गई।सूचना मिलते ही मंडल के सभी संबंधित विभाग सक्रिय हो गए। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) तरुण हुरिया, अपर मंडल रेल प्रबंधक, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी, सहायक मंडल संरक्षा अधिकारी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता (ओपी), वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक सहित अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया।
टाटानगर रेल सिविल डिफेंस ने तत्परता से चलाया बचाव अभियान
दुर्घटना की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार के नेतृत्व में टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की टीम आवश्यक बचाव सामग्री के साथ घटनास्थल पर पहुंची। टीम के 27 जवानों ने घायल यात्रियों को निकालने, प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने तथा उन्हें चिकित्सा शिविर तक पहुंचाने का अभ्यास किया।विकट परिस्थितियों में कोच के भीतर फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालने में एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन के जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बकेट स्ट्रेचर और रस्सियों की मदद से घायलों को कोच से नीचे उतारकर प्राथमिक चिकित्सा शिविर तक पहुंचाया गया। वहीं, आधुनिक उपकरणों की सहायता से कोच की खिड़कियां काटकर फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का अभ्यास किया गया।मॉक ड्रिल के निर्धारित परिदृश्य के अनुसार कुल 19 यात्रियों के घायल होने तथा चिकित्सा दल की जांच में तीन व्यक्तियों के मृत पाए जाने की स्थिति दर्शाई गई। चिकित्सा दल ने घायलों की जांच एवं प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया का अभ्यास किया।
यात्रियों के सामान की सुरक्षा और सहायता पर भी रहा जोर
मॉक ड्रिल के दौरान दुर्घटनास्थल पर यात्री का सामान लेकर भाग रहे एक चोर को पकड़कर जीआरपी के हवाले करने का अभ्यास भी किया गया। साथ ही घायल यात्रियों के सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। यात्रियों एवं उनके परिजनों को आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टाटानगर, चक्रधरपुर और राउरकेला स्टेशनों पर हेल्प डेस्क स्थापित करने की व्यवस्था का भी अभ्यास किया गया।इस अभ्यास में टाटानगर रेल सिविल डिफेंस के 27 जवानों के अलावा रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के 45 जवान, स्काउट्स एंड गाइड्स के 23 सदस्य तथा सेंट जॉन एम्बुलेंस के बड़ी संख्या में स्वयंसेवक शामिल हुए। मॉक ड्रिल के लिए टाटानगर सिविल डिफेंस टीम की ओर से डमी तैयार की गई थी, जिसके माध्यम से दुर्घटना की वास्तविक स्थिति जैसा वातावरण बनाया गया।
डीआरएम ने राहत-बचाव कार्यों का लिया जायजा
मॉक ड्रिल के समापन पर डीआरएम तरुण हुरिया ने विभिन्न विभागों द्वारा किए गए राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने आपदा के समय यात्रियों की सुरक्षा, त्वरित प्रतिक्रिया और विभागों के बीच बेहतर समन्वय को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सहायता केंद्रों की संचार व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी सुझाव दिए।डीआरएम ने टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए नियमित अंतराल पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि वास्तविक दुर्घटना के समय सभी संबंधित विभाग बिना विलंब के प्रभावी कार्रवाई कर सकें।बताया गया कि आपदा प्रबंधन एवं संरक्षा संबंधी तैयारियों को परखने के लिए इस मॉक ड्रिल का समय निर्धारित समय से पहले अचानक मध्यरात्रि में रखा गया था। इसके बावजूद मंडल के संरक्षा विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने राहत-बचाव कार्यों का अभ्यास किया। लगभग तीन घंटे तक चले इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य रेलवे की आपदा प्रबंधन क्षमता, संसाधनों की उपलब्धता, संचार व्यवस्था तथा यात्रियों को सुरक्षित निकालने की तैयारियों को और बेहतर बनाना था।
