Uttar Pradesh: मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की हुई थी हत्या

मेरठ: चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में बुधवार को मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। दोनों को मार्च 2025 में मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में 30 सितंबर 2026 को दोषी करार दिया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में बंद कर दिया गया था।

अदालत ने कहा- ‘दंड भी धर्म है’

मेरठ की जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराते हुए सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।रिपोर्टों के अनुसार, फैसला सुनाने से पहले न्यायाधीश ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा, “दंड भी धर्म है।” अदालत की टिप्पणी का आशय था कि अपराध करने वाले व्यक्ति को दंड देना भी धर्म का हिस्सा है। फैसले के दौरान अदालत कक्ष में ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई।

लंदन से लौटे थे सौरभ राजपूत

मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे। वह इंदिरा नगर स्थित अपने घर पहुंचे थे। अगले दिन, 25 फरवरी को उनके घर पर पत्नी मुस्कान रस्तोगी का जन्मदिन मनाया गया था।अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इसके बाद सौरभ की हत्या की साजिश रची गई। मामले में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया।

नीले ड्रम में छिपाया गया था शव

मामले में अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि 3 मार्च 2025 को सौरभ को नींद की दवा दी गई। इसके बाद मुस्कान ने साहिल शुक्ला को घर बुलाया और दोनों ने मिलकर सौरभ की हत्या कर दी। फिर शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में बंद कर दिया गया।4 मार्च 2025 को मुस्कान अपनी बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ शिमला चली गई। इस दौरान सौरभ के फोन से संदेश भेजकर परिवार को गुमराह किए जाने का भी आरोप है।

17 मार्च को हुआ था हत्याकांड का खुलासा

17 मार्च 2025 को शिमला से लौटने के बाद मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने जांच शुरू की और घर में रखे नीले ड्रम से सौरभ राजपूत के शव के टुकड़े बरामद किए। इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया।इस घटना ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। शव को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाए जाने के कारण यह मामला ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हुआ।

13 महीने चली सुनवाई, 22 गवाहों के बयान दर्ज

मामले की सुनवाई मार्च 2025 से सितंबर 2026 तक चली। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दौरान अदालत में कुल 126 पेशियां हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। करीब 545 दिनों की कानूनी प्रक्रिया और अंतिम बहस के बाद 30 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया।इसके बाद बुधवार को अदालत ने सजा सुनाते हुए दोनों को मृत्युदंड दिया।

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